• oracular_ 9w

    नादान खंगालते रहे उसका हाल
    लफ्ज़ो की सिलवटों में कहीं

    उसकी ख़ामोशी वही बैठकर देखती रही
    वो मुफ़्त का तमाशा

    चंद सिक्के चटखते लफ्ज़ो के और
    फ़ेंक दिए कंगालों की ओर

    एक जम्हाई लेकर थोड़ा सा इतराई
    भरी ऐंठन में एक अगंड़ाई और चली गई

    ©oracular_