• misty_2004 7w

    एकबार फिरसे सुक्र गुज़ार हु @maakinidhi जी का की उन्होंने मुझे ये मौका दिया कि मैं #prayasss19 का संचालन कर सकू।
    आज का विषय,"उम्मीद बदलाव की"।
    मैं आप सबको इस विषय पर लिखने के लिए आमंत्रित करती हूँ। आशा है आप सब इसको सफल बनाने में योगदान देंगे।��

    आजकी #abhivyakti50 का विषय,"पहल"।
    ये विषय @goldenwrites_jakir जी द्वारा निर्धारित है।��

    कोई भूल-त्रुटी हो तो मुझे माफ़ कीजियेगा।

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    *उम्मीद बदलाव की*

    दुनिया की तौर-तरीकों से शिकायत तो सब करते हैं,
    क्यो ना हम आज उम्मीद करे एक बदलाव की।
    चलिए आज आत्मदर्शन करते हैं अपना,
    ढूंढते हैं खुद में छुपी प्रयास में कमियों की।

    बंद आँखों से थे जो सपने देखे,
    चलिए आज उन्हें खुली दृष्टि से देखे।
    आत्मनिर्भर होके चलिए आज
    किसी भटके मन को राह दिखाएं।

    क्यो ना शिक्षन दे आज एक ज़रूरतमंद को,
    उस सरकार के भरोसे ना बैठके,प्रचार करे अपने ज्ञान को।
    ना हो लोभ, ना ही हो लिप्सा।
    अगर होनी है तो, हो बदलाव की प्रतीक्षा।

    चलिए आज एक पौधे को एक ज़मीन का तौफा दे,
    इस धुंए से भरी दुनिया को खुलकर साँस लेने का मौका दे ।
    चलिए हटा देते हैं दूसरों से बदलाव की उपेक्षा,
    चलिए आज कदम बढ़कर करे धरती माँ की सुरक्षा।

    चलिए आज एक साथ धूप में काम करे,अमीर और गरीब,
    चलिए आज गले लगाके मुस्कुराये सीख-ईसाई-हिंदू-मुसलिम।
    एकता की बाती जलाये साथ होकर औरत और पुरुष ,
    समाज मे परिवर्तन के लिए लड़ते हैं चलिए, दिलों को रखकर तन्दरूस्त।

    आज विचार धारा बदलने का समय है आया,
    ना जाना हो बृद्धाश्रम कीसी माँ को,जिसने ज़िंदगी भर आग में लिपट के आपको खिलाया।
    आज हर बेटी पढ़ेगी-लिखेगी जाएगी स्कूल,
    कोई बेटा आज नही बनेगा बाल-मज़दूर।

    चलिए आगे बढ़े, पीछे छोड़के डर को,
    रक्त दान करते हैं, बिना सोचे उच्च-नीच जात-पात के बिषय को।
    चलिए सुने उन खिलखिलाति मुस्कानों के आवाज़ को भी,
    ये भी समझे चलिए, की सिख मिलती हैं छोटो से भी।

    चलिए आज अहंकार को सहनशीलता में बदले,
    चलिए दूसरों की सोच भी आगे बढ़ाएं, हर विचार को बढ़ावा दे।
    धरती घर हैं मेरा ,समाज मेरा कमरा हैं,
    इस सोच को लेकर आज हमे समय को बदलना हैं।

    चलिए आज अपना नज़रिया बदले,एक विधवा को भी दे रंगों की खुशहाली,
    चलिए आज एक दुनिया सजाये जहा हर सड़क फूलों से भरा बाग़ नज़र आये।
    चलिए आज हम सब करे एक सुरुवात नई,बदलाव लाये कुछ इस प्रकार,
    हमारी अगली पीढ़ी इस सोच की सराहना करे, हर रोज़ मने खुशियो का त्यौहार।

    ~स्वर्णाली
    ©misty_2004