• hk_singh 24w

    राजनीति

    माँ के कोख से ही जन्मति है यह राजनीति
    तेरी मेरी और अपनों की भूख ही है यह राजनीति
    किसी को राज का है शौक किसी को लिबास का है
    पैरों में चप्पल हो ना हो पर ख्वाब महल का है
    दूसरों की इच्छा का मोल नहीं पर मोह अपनों के कल्याण का है
    कुछ ऐसी ही परिस्थितियों में पनपती है यह राजनीति
    चलो गौर करते हैं तुम्हारे व्यक्तित्व पर
    जिससे तुम ईर्ष्या करते हो
    उस को हानि पहुंचाना क्या राजनीति नहीं ?..
    या जिससे तुम प्रेम करते हो उसको पाने को किए गए अलग-अलग प्रयास क्या वह राजनीति नहीं ?...
    चालाकी, ईर्ष्या और मोह का ही सूत्र है राजनीति
    क्यों, मानते हो ना तुम राजनेता हो?

    ©hk_singh