• i_am_parul_vats 31w

    एक आखिरी बार

    कहीं एक दो गलियाँ छोड़ कर,
    उसका घर हुआ करता था,
    हर रोज़ वहां से गुज़रते हुए,
    एक डर सा मुझको लगता था।

    सबसे अलग, बचपन जैसी थी वो,
    उसे रोक कर, इत्मिनान से देखना चाहता था,
    पर वो कहाँ रुकने वाली थी, हर ख्वाब वो लेकर चली गयी,
    जिस ख्वाब को पाना चाहता था।

    घर वो वहां आज भी है,
    चेहरे बदल गए हैं, पर खुशबू उसकी वहां आती है,
    अब वहां मैं नहीं जाता, हर रोज़ जहां उसे पाता था,
    एकदम से क्यों वो चली गयी,
    मैं बस एक आखिरी बार उसे देखना चाहता था।

    ©i_am_parul_vats