• ramaiyya 24w

    मत कर बेबस उसको

    ऐ पिता तू पुत्री के,
    बेटी के अंदर झांक जरा,
    जो उससे भी उतना प्यार करती है,
    जितना वो तुझ पर मरती है।।

    किसी एक की भी दूरी से,
    उसके दिल में तन्हाई पसरती है,
    वो दिन मत आने दे तू,
    वो तेरी सहमति को तरसती है।।

    तुम में से एक चुने क्यो वो,
    तुम दोनों ही हो दिल के करीब,
    एक को अपनाने की खातिर,
    एक को त्यागे वो हो निस्सहाय,
    इतना भी उजडा क्यों उसका नसीब।।

    आंखों में आँसू तू भी देखेगा कैसे,
    ले कर झूठी इज्जत और समाज के जाली साथ को,
    उसकी भी मर्जी को परख जरा तू,
    दिल उसका भी खुश होगा,
    जैसे जीवन उसका रोशन रात हो।।

    मुसीबत जब आएगी कोई,
    कौन मार्ग दिखाएगा उसको,
    इन निर्मम कठोर लोगों में,
    वास्तविकता देख व्यवहार की तू,
    जब आस पास सब मशगूल यहाँ
    पैसे की अभिलाषा और मदिरा के भोगों में।।

    अटूट भरोसा जिस पर उसका,
    हर्ष उसी के साथ जीने में,
    तू उसे किसी को भी सोंप दे चाहे,
    दिल वही धडकेगा उस सीने में।।

    जो तुझसे जुडी है बचपन से,
    तुझे करे प्यार जो मन से,
    एक बार तू झकझोर खुद को,
    निकल जरा इस जाति के बंधन से।।
    ©ramaiyya