• surbhi_verma 10w

    इश्क़ भिगोया था मैंने एहसासों की स्याही में ,
    दिल के अनगिनत टुकड़े आज भी गवाह है !

    इन अनगिनत टुकड़ों से किताबें भर देंगे ! क्या करे ?
    कमबख्त मेरे अल्फ़ाज़ आज भी लापरवाह है !


    ©surbhi_verma