• theignoredone 23w

    ज़िंदगी - 2

    प्यास लगी थी तुम्हारी,
    तुमने ज़हर देकर छोड़ दिया।
    दिल की ज़मीन को तुमने
    बिन पानी ही छोड़ दिया।

    सोचा था तुझे ज़िंदगी भर निहारेंगे,
    तुमने तो हमारा देखने का नज़रिया ही बदल दिया।
    सोचा था ज़िंदगी साथ गुजारेंगे तुम्हारे,
    तुमने तो साथ रहना ही छोड़ दिया।

    थी ज़रूरत मुझे तुम्हारी,
    तुमने भी अपनी ज़रूरतों को चुन लिया।
    गम नहीं है आज मुझे किसी बात का,
    क्योंकि आज हमने तुमसे दिल लगाना ही छोड़ दिया।


    - अनुज भसीन
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