• the_purple_pot 9w

    मोम सा दिल

    वो रुका था क्या....?
    जब ठेहरे तुम......
    या पीछे पलट कर देखा उसने....?
    कोई आवाज लगाई तेरे नाम की......
    या फिर औरों से पूछा उसने.....?
    तो कैसा ये इंतज़ार तेरा...
    और किस बात का है अफ़सोस....?
    यूं आस लगाए जीना तेरा,
    क्या आसान राहा हर रोज़....?

    क्या दर्द में था,वो भी उस दिन....?
    जब रात तेरी कटि रोने में,
    या चैन से वो था सोया राहा....
    जब सिसक रही थी कोने में....?
    फिर कैसी फिक्र तेरे मन को....?
    यूं बहलाती फुसलाती है....?
    जो पीर गया तेरे दिल को,
    उसकी अब भी याद सताती है....?

    माना तेरा दिल मोम का है....
    हर एक के भूल को भूल गया ।
    क्या पुछा कभी उस ज़ख्मी से,
    के गल पिघल कर बना वो क्या....?
    शायद तेरे ही अंदर है....
    वो बेबस पत्थर का पुतला,
    तेरी खुद से जो खुदगर्ज़ी थी....
    अब और उसे तू मत झठुला....?

    ज़रा पूछ अपने उस पुतले से
    वो मोम से पत्थर कैसे बना.....?
    गर बेहेल गया हो सब का मन,
    तो कुछ पल खुद का साथ निभा ।
    जो रूठ गयी है खुद से तू ,
    गैरों की छोड़,पेहले इसे मना ।
    ©the_purple_pot