• unspoken_ishu 10w

    एक तो सपना है कि कुछ तो करना है,
    पर पता नहीं कैसे, करना है पर।
    अभी वक़्त ने करवट उस तरफ़ ली है,
    शायद वक़्त आने पर वक़्त इस तरफ़ भी करवट लेगा।
    जेब खाली है और ऊपर से ज़िम्मेबारी का बोझ,
    उससे भी ऊपर बैठे पड़ें है बड़ी शान से सपने।
    घोट रहें हैं वो मुझे, शायद कभी तो फटूंगा, कभी तो फोदूँगा।
    बहुत निम्न से महसूस कर रहा हूँ, आखिर क्यों लिख रहा हूँ,
    या शायद अपने मूल्यों से सौदा करना पड़े।
    बस एक सपना है कुछ तो करना है।

    ©unspoken_ishu