• rohitsrivastva 5w

    दिल की बात

    हमने भी हाथ अपना रोका नहीं
    जो दिया उसने हमें मै वही देता गया
    अपनी हिस्से की भी उम्र मै देता गया
    केह गये थे हमसे वो वो तू कभी रोया नहीं
    देख आज मै कई रातो से सोया नहीं

    चाह होती अगर हम हिरा तराशते
    खुद की चमक छोड़ के यूं ना रास्ते पे भागते
    जो नहीं लाये थे हम वो लेके क्या जायेगे
    जरुते नहीं मेरी किसके वास्ते हम कमाएँगे
    जो पाया यहां वो यही छोड़ जाऊंगा मै

    मुकदर का लिखा हम नहीं मानते है
    मंदिर मस्जिदों के चकर हम नहीं काटते
    कुछ लोग जान जाये बस यही खाब है
    अपनों के ना सही गैरों के लब पे मेरा नाम है
    बस गुजर जाये यूही उम्र का ये काफिला
    हम तो मनमौजी सही हमको क्या दुनिया से कोई काम है

    मेरी कलम
    ©rohitsrivastva