• amanhbajpai 37w

    न जाने इतने दिनों बाद
    जिंदा हो गए कैसे
    कुछ दिनों से मेरे घर पे
    तुम्हारा किरदार निभा रहे है
    खोलने की जहमत नही उठायी दोबारा हमने
    यूं ही रखे है खत आज भी तुम्हारे
    किताबों में धूल खा रहे हैं।

    खत पर उभरी हुई इबारत याद है
    मुझे आपकी पहली सी मोहब्बत याद है
    कुछ दिनों से फिर चलने लगी है
    भूलने भुलाने की जद्दोजहद
    तेरे साथ जो बीते जमाने याद आ रहे है
    यूं ही रखे है खत आज भी तुम्हारे
    किताबों में धूल खा रहे हैं।

    जिंदगी बहुत दूर ले आयी है हमको
    खत पे बिखरे हुए अहसास वहीं वापस बुला रहें हैं।

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    यूं ही रखे है खत आज भी उनके
    किताबो में धूल खा रहे है।
    जिंदगी बहुत दूर ले आयी हमकों
    खत पर लिखे अहसास फिर वहीं बुला रहे है।
    ©amanhbajpai