• hemendra_singh_7773 31w

    कविता 'मे'

    मे ऐसा कवि हु दिल से बात करता हू
    यह जगह कितना विशाल है मे गुमसुम रहना पसंद करता हू

    मै दुनिया कि राजनीति को छोड़कर अकेला रहना पसंद रहता हू
    मे ऐसा कवि हु कविता से प्रेम करता हू

    मे परमात्मा कि देन सुंदर प्राकृतिक की घोद मे आनंद करता हू
    मे त्रिपुरा लगा कर शिव कि ध्यान करता हू

    -hemendra Singh dabi