• vardhantesoro 6w

    शायद रावण बड़ा 🙏🏻

    मूर्तिकार पत्थर पर दी हर चोट पर यही चाहता हैं की मूर्ति का रूप निखर आयें और लोकभावन मूर्त के रूप में लोग इसे निहारने लगे.. मन हीं मन वो जानता हैं कि जिस शान ओ शौक़त से वो ता उम्र दूर रहा हैं आने वाला कल इस मूर्ति को वो सौहरत दिलवाएगी..मूर्ति कितनी महँगी होगी ये मूर्तिकार कीं मनोचेतना से दी चोट पर निर्भर करता हैं..मूर्तिकार हीं मूर्ति के भविष्य का रचियता हैं ..
    यह मूर्तिकार मुझे रावण में दिखता हैं जिसने सृष्टि को परखा और राम रूपी मूर्ति को गढ़ा..श्री राम का क्या भविष्य होगा ये रावण जानता था ,क्यूँकि वो ख़ुद से ज़्यादा उस मूर्त को चाहता था.
    रावण तेज़ बुद्धि होने के साथ ईश्वर की और झुका था,अहंकार नहीं उस पर ज्ञान हावी था ,उसे ज्ञात हुआ जीवन का रस जीने में नहीं अपितु मोक्ष में हैं,इसलिए उसने अपने कल्याण हेतु राम को गढ़ा..रावण जैसा भाई हर बहन की चाह रही हैं..वो महिलाओं सम्मान बेहतर जानता था..राक्षस रूप की कुरूप महिलाओं को भी उसने लंका में जगह दी थी अतः वो स्वामी भक्ति को सर्वोच्च मानता था..
    सीता हरण के समय बलशाली रावण ने उन्हें छुआ तक नहीं क्यूँकि पतिव्रता का सम्मान वो बेहतर जानता था..इस जगह तो राम भी रावण से हार गए थे.. ख़ैर आज जैसे खुल्ले विचारों का रावण वैभव और समृद्धि से परिपूर्ण राज्य का राजा था..फिर भी उसने श्री राम को मोक्ष ज़रिया बनाया.,और इन सबमे विभीषण ने उत्प्रेरक का कार्य किया.राम ने विभीषण संग मिल छल कपट का चुनाव किया और रावण से यहाँ भी मात खा गये..प्रणाम विभीषण को जिन्होंने मोक्ष प्राप्ति में सहायता कीं..
    वैसे शास्त्रों और पांडुलिपियो में रावण को लेखन में छुपाया गया क्यूँकि श्री राम को उभारना जो था.. रावण इतना विशाल रहा की क़िस्से और कहानियाँ मात्र किवदंतियाँ रही,क्यूँकि जो महान होते हैं लोगों में उनके चर्चे कम होते हैं..इसलिए में रावण को केवल कल्पना स्वरूप हीं जानता हूँ..
    पर राम को अगर मर्यादा पुरूषोतम अगर किसी ने बनाया हैं तो रावण ने बनाया हैं.. रावण इतना महान था की बुरा कहलाकर भी लोगों की ज़ुबां पर रह गया..और ये रावण दहन मात्र लोगों को ये दर्शाना हैं कीं राम महान थे रावण से।।
    प्रणाम लंकेश प्रभु आप क़िस्से और कहानियो में नही बल्कि जीवन के सत्य मूल्यों में जीवित व महान हैं..
    ©vardhantesoro