• amritpalsinghgogia 6w

    138 अपने

    आज कोई भी नहीं जिसको मैं अपना कहूँ
    कल जो अपने थे क्या उनको सपना कहूँ
    दूर दूर तक अंबार लगा है रिश्तेदारियों का
    मुझे एहसास नहीं शायद ज़िम्मेवारियों का
    अमृत पाल सिंह ‘पाली’