• ___moonlight7 10w

    तू कातिल हुआ, मैं बिस्मिल हुआ
    फिर आसमां झिलमिल हुआ |
    तेरी आरजू तेरी चाह में, तेरे रुबरु होने लगा |
    शामें मेरी लम्बी हुई, सुबह की राह तकने लगा |
    ठंडी हवा चलने लगी, नींदे मेरी उडने लगी |
    मौसम मेरा सावन हुआ, यूं कांरवा बढ़ने लगा |
    तू चाँद मेरा हो गया, तेरी चाँदनी भरने लगा |
    फिर हर अमावस रात को तमराज से भिड़ने लगा |
    तुझ बिन मैं तेरे साथ-साथ किस्से मेरे कहने लगा |
    कुछ इस तरह तेरे प्यार में, मेरी जां निसां पागल हुआ॥
    - chandra prakash