• quaintrelle07 10w

    कभी पाला करती थी
    जो हजार हसरते
    वो जुबान आज चुप हो के
    सूखे होठों के पीछे छुप गयी हैं
    कसूर उसका नहीं है शायद
    मुझे लगता हैं एहसासों का है
    टकराते रहते है बार बार
    दिल के इस कोने को ले के
    उस कोने तक
    कमब्ख़त बाहर ही नहीं आते
    हां है
    कुछ हैं
    जो दिल तोड़ के बाहर आ जाते हैं
    खुद को समेट के अलफ़ाज़ बन ही जाते हैं
    पर अफ़सोस गले तक आके ही अटक जाते हैं
    कोई पोहचता ही नहीं जुबान तक
    अब तुम ही बताओ
    इस में मेरा क्या दोष है भला
    सब कहते हैं
    'खामोश सी हो गयी हैं' |
    ~Vaishnavi ♥️
    ©quaintrelle07