• wearyearl 10w

    Read All Parts Of उलझन ( ULJAHN ) = #weary_s5

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    -----/// PART- 2 ///-----

    महज 10 साल की उम्र में मुझे चार दिवारी में बंद कर दिया गया था ,मेरे साथ बेरहमी हई थी, मेरे साथ छेड़खानी हुई थी।
    दुनियादारी, अच्छा बुरा इस सबसे दूर मै अपने ही ख्वाब देखने वाली ,अब एक कमरे में बंद रहने लगी थी। मेरे साथ क्या हुआ था किसने क्या किया क्या था मुझे इस बात का थोड़ा भी एहसास नहीं था। पर ना जाने क्यों मेरे मोहल्ले के दोस्त, अब मुझसे मिलने नहीं आते थे।
    मेरी मोहल्ले की वो औरतें जो मुझे देख कर मुस्कुराती हैं वो अब मुझे देखती भी नही थी। वो अब मेरे करीब भी नहीं आती थी। मेरी माँ भी अब मुझसे घर के कामो में व्यस्त रखने लगी थी।
    मैंने अपनी मां और दोस्तो को तो परेशान भी नहीं किया था। फिर भी ना जाने क्यों सब मुझसे दूर रहने लगे थे। मेरी मां मुझे अब मुझे कम बात करना सिखाने लगी थी , पर इस सबके बीच मेरे पापा ने मेरी मा और समाज से लड़ कर मेरा दाखिला एक बार फिर स्कूल में करा दिया था।
    नहीं ऐसा नहीं था कि मेरी माँ मुझसे प्यार नहीं करती हैं, पर वो थोड़ा डरती थी समाज से,ना जाने किस बात का डर था उन्हें।

    मै अब 12 साल की हो गई थी। मै अब कक्षा 7 में पढ़ रही थी। थोड़ी थोड़ी समझ भी मुझे आने लगी थी। मै चीज़ों को समझने लगी थी। लेकिन मेरे साथ जो पिछ्ले 2 सालो से चला आ रहा था, उसे मै अब तब नहीं समझ पाई थी। क्योंकि शायद किसी ने मुझे उस बारे में बताने, उस बारे में मेरी समझ खोलने से जायदा मुझे नज़रबंद करना सही समझा था।
    खैर, एक बार फिर मै अपने सपने बुनने लगी थी। अब वो पिछड़ा साल अब मेरी लिए कोई कहानी सी बनने लगा था। मुझे डाक्टर बनना था। और मै उसी सपने को बुना करती थी। लेकिन मेरी माँ ये सब समझाती ही नहीं थी। उन्हें बस मुझसे रोटियां बनवानी थी। अब सब कुछ ठीक हो गया था। लेकिन शायद मेरी किस्मत को मेरी खुशी मंजूर नहीं थीं।

    क्यों रुकना हैं, क्यों झुकना हैं,
    बेड़ियों को पार कर मुझे तो अपना आसमां भी खुद बनाना हैं,
    ज्वाला बन मुझे तो खुद में आग भी लगानी हैं और शीतल जल बन मुझे जिंदगी में ढहराव भी खुद ही लाना हैं।

    To Be Continued....������

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    PART- 2

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