• sumitpareek 24w

    हे प्रभु

    पहले में समझता तुझको सब कुछ पर अब खुद को कुछ समझता हूं ।
    पहले करता था तेरी इबादत । अब उसमें भी दिखावट बिखेरता हु ।
    पहले अहसासों में करता तुझसे में कुछ बाते तेरे हर एक इशारे को समझता था ।
    पर अब तो में तुझसे ही तेरे होने का सवाल करता हु ।
    पहले चलता था तेरी राह पर पर अब खुद को मंज़िल समझता हु ।
    पहले मुलाकाते करता था तुझसे में हर घड़ी अब तुझको ही में तुझमें ढूंढता हु
    मेरी मुस्कुराहटो को समझ बैठी दुनिया मेरी ताकत
    मैं तेरी उस उस रहमत को भी अपनी समझता हु ।
    पकड़ ले इस बंदे को मालिक क्योंकि में राह से भटकता हु
    आज फिर तेरी बंदगी को पाना हे
    दिखावट में नही बस तुझमे रम जाना ।
    जो मुस्कुराहट मिली थी तेरी रहमतो से उसे ही फिर पाना हे
    दे दे फिर इक बार सहारा मुझे मै को तुझ मै मिलाना हे।
    दूर हो गया हूं तुझसे मैं मालिक तेरे होने का मुझे फिर से अब अहसास पाना हे।
    #sp #original
    ©sumitpareek