• _shayraa_ 9w

    उनके कदमों की आहट को हम पैग़ाम समझ बैठे,
    उन्होंने दिल क्या माँगा, हम तो जान ही दे बैठे।

    उन्होंने चौराहे पर हमारा हाथ क्या थामा, हम उन्हें हमसफ़र मान बैठे,
    हमने उनसे मंज़िल क्या पूछी,वो तो राह ही मोड़ बैठे।

    उनसे धोखे से नज़रें क्या मिलीं,हम तो आँख ही चुरा बैठे,
    हमने उनसे ख़ुशी के आँसू क्या माँगे, वो तो हमें रुला ही बैठे।

    उनसे एक बार बात क्या छुपाई,वो तो झूठ ही करार कर बैठे,
    हमने वफ़ा का ज़िक्र क्या किया,वो तो बेवफ़ाई ही कर बैठे।

    उनसे हमने साथ चलने का वादा क्या लिए,वो तो हमें ठुकरा ही बैठे,
    हमने उनका साथ क्या निभाया,वो तो हमें तन्हा ही कर बैठे।

    उनसे दिल के राज़ क्या खोले,वो तो हमें तड़पा ही बैठे,
    हमने उन्हें इक़रार क्या सिखाया,वो तो किसी और से ही दिल लगा बैठे।
    ©_pm167_