• neeraj_samariya 23w

    आतंक

    ना हरा है आतंक ।
    ना भगवा है आतंक ।
    तेरे दिल में भरी नफरत है आतंक ।
    ना मुसलमां है आतंक ।
    ना हिंदू है आतंक ।
    वह स्वार्थ में लिप्त इंसान है आतंक ।
    ना तू हिन्दू है ।
    ना तू मुसलमां ।
    तू तो बस एक इंसान है।
    जो जानता नहीं क्या है आतंक।
    क्या है आतंक।
    उस मां,बहन,पत्नी,दोस्त की आंखों में दिखाई देने वाला डर है आतंक ।
    धर्म जाति के नाम पर कत्ल बलात्कार है आतंक ।
    तेरी यह नासमझी, लापरवाही है आतंक ।
    क्या तू है आतंक ?
    हां तू ही है ये आतंक ।।
    ©neeraj_samariya