• shayartera 23w

    एहसास...१३२

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    " आज भी सिसक है , होंठों पर ,
    आज भी , एक कसक बाकी है ।

    आज भी संभालता हूँ ख़ुद को ,पर ,
    आज भी एक झिझक बाकी है ॥

    आज भी कहने वास्ते , बात है कई ,
    आज भी मगर , कुछ शर्म बाकी है ।

    तेरी यादें है के अब पिघल रहे गोया ,
    बचे फ़क़त , कुछ अश्क बाकी है ॥ "

    ।।✍ब्रिज।।
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