• ankit_chandravanshi 6w

    जो रावण के तुम गुण गाते ।
    जो रावण को तुम भक्त बताते ।
    जो रावण सा तुम भाई हो चाहते ।
    जो रावण को विद्वान बताते ।

    *क्या सच में जाना है रावण को ???*
    या कहीं सुनी तुम बात दोहराते ।।

    आ मैं बटलाऊ क्या था रावण...
    था एक वहशी, कपटी रावण...
    अधर्मी रावण, पापी रावण...
    राक्षस राज घमंडी रावण...

    सीता को ना छूने पर, जो उसकी वाह वाही तुम करते हो
    क्या नलकुबेर के श्राप का ज़िक्र भी तुम करते हो ??

    हो भाई मेरा माँ रावण सा, जिसने बहन के खातिर अपने प्राण दिए
    क्यों नहीं बतलाती ओ माई इन बहनों को,
    रावण ही था जिसने अहंकार में, जीजाजी के प्राण लिए ।।

    वो भक्त कहां से हो पाए, जो धर्म अधर्म ना समझ पाए ।
    वो विद्वान कहा से कहलाए, जो ज्ञान का उपयोग ही ना कर पाए ।।

    जो इतना भी ना तुम समझ सको..
    क्यों रावण.. रावण.. कहलाए ।
    फ्र कितने पुतले फुकों यारो . .
    रावण ऐसे ना मर पाए ।।
    रावण ऐसे ना मर पाए ।।