• monikakapur 20w

    राम को स्थापित करें

    हर बार जलाया जाता है
    हर साल लौट के आता है
    गिरता है जो पुतला उस का
    फिर पुनः बनाया जाता है
    हर वर्ष जीवित हो जाता है
    फिर उसे जलाया जाता है
    क्या रावण सच में मरता है?
    या बस मन को मनाया जाता है
    वो मौन खड़ा, पुतले में बंधा
    ये सोच सोच मुसकाता है
    है मुझ से अधम सब लोग यहाँ
    बस मुझे जलाया जाता है
    ये सज धज के, साधु बन के
    जो मुझे जलाने आते हैं
    कह कर के दुष्ट , अधम मुझको
    मुझ पर ताने बरसाते हैं
    यदि देखें अपने भीतर तो
    मुझ से बड़ा अहं वो रखते हैं
    मैं दस सिर वाले रावण था
    सौ रावण इन में बसते हैं
    ये क्रोध, लोभ, मोह, मद, घृणा,
    ईर्ष्या, द्वेष ,मत्सर,भय जैसे सिर
    जब तक ना हटाए जाएँगे
    हर साल जीवित होगा रावण
    हर साल ये पुतले जलाए जाएँगे
    जो वास्तव में मरना है रावण को
    तो भीतर का रावण जलना होगा
    मन में नेकी का दीप जला
    राम को स्थापित करना होगा
    ©monikakapur