• prachi 23w

    हाँ, हम करते है आपसे ज्यादा मोहब्बत

    अपने अंदर की कमियों से ज्यादा
    मन में बसे बेचैनियों से ज्यादा
    ख़तम ना हो जाये आपका प्यार उस डर से ज्यादा
    कमी ना रह जाये हम में कोई उस ख़याल से ज्यादा ..
    करते है हम आपसे मोहब्बत...

    रोज़ लड़ रहे अपने अंदर के कालेपन से ज्यादा
    बिखरे हुए अपने अंदर के शैतान से ज्यादा
    आईने के सामने खड़े होकर याद आते है कई ताने
    उन आवाज़ों में लिपटे हुए मेरे अतीत से ज्यादा
    करते है हम आपसे मोहब्बत...

    छुप छुप कर मिलने के उस एहसास से ज्यादा
    तेरे किस्से बयान करते मेरे अलफ़ाज़ से ज़्यादा
    था तेरा दिल कभी किसी और का दीवाना
    पर अब कैसे छुपाऊ तुझे सबसे इस सवाल से ज्यादा
    करते है हम आपसे मोहब्बत...

    दिल है थोड़ा कमज़ोर मेरा, क्या करू हूँ मैं डरपोक
    पर मैं लड़ती हूँ रोज़ खुद से, अपने अंदर के ज़ज्बातो से
    बाँध नहीं सकती हूँ तुझे खुद से, बना है तू खुली आसमान के लिए
    पर लौट आएंगे आप हमेशा हमारे पास उस उम्मीद से ज्यादा
    करते है हम आपसे मोहब्बत ....
    ©prachi