• yashashvigupta_07 9w

    एक रोज़ जब ढूढोगें तुम मुझे,
    इन बिखरे बंद दरवाजे में,
    महसूस करोगे मेरी आहटों को,
    उन हवाओं के सरसराहट में,
    ढूढ़ोगे मेरी हँसी को उस
    उजली-सी धूप में ,
    कभी शायद महसूस भी करोगे
    मेरी मौजूदगी तुम साथ अपने
    उन अकेले रास्तों पर ,
    बीते पल के उन हर हसीन लम्हों को
    जब तुम याद करोगे एक रोज़,
    औऱ ढूढ़ोगे 'हम' को उस पल में,
    मैं मिलूँगी वही वैसे ही तुम्हें निहारते हुये
    एकटक उन सितारों के बीच से,
    उन सितारों के बीच से...