• ishq_e_hindi 4w

    चलो गाँव चले

    समय की बेंडिया तोड कर , रास्तों की दूरियों को जोड़ कर
    ख़ाली रिक्शे में बैठकर, नये महलो को छोड़कर
    इस धुएँ की जलन मे बैठकर इतना गहरा क्या सोचते हो
    यूं खुद से खुद में क्या बोलते हो
    क्या किया क्यों किया नहीं सोच पाए ना
    खुद से किए वादे नहीं निभा पाए न
    चलो ज़ंजीरो को तोड़कर अपनो से मिले
    चलो गाँव चले।।
    ©ishq_e_hindi