• andaaz_e_shaayaraana 22w

    बेतुके से कुछ मरासिम थे ईर्द - गिर्द लबरेज़...
    ख़त्म होने की कोई मियाद ना थी...
    इन्तेहा हो गई "अंदाज़"...
    इनकी कोई इन्तेहाई ना थी...

    * "मरासिम = रिश्ते"
    * "मियाद = समय - सीमा"

    - अंदाज़ - ए - शायराना