• shivangi_tiwari 45w

    मैं बदल गई

    लोग कहते हैं,
    मैं बदल गई।

    कहते हैं,तुम्हारा
    बदला है हाव-भाव,
    बदला है बर्ताव ।
    और बदले तेवर संग,
    बदला है कलेवर।
    न वो रोज़ के रहे नियम,
    न वाणी पर रहा संयम।
    न बोली में रही मिठास है,
    हमे आता न ये रास है।
    बुद्धि जाने किस माहौल में,
    तुम्हारी ढल गयी?
    हाँ,तुम बदल गयी।

    क्या जानेंगे वे,
    कि रोज़ ही टूट रही हूँ।
    ज़रा-ज़रा हर दिन,खुद से
    छूट रही हूँ।
    खुलकर हंसना तो दूर,
    नकली ही मुस्कुराती हूँ।
    खुद का उपहास उड़ाकर,
    खुद को ही बहलाती हूँ।
    पर वक़्त के साथ,सुध-बुध मेरी,
    जैसे-तैसे पल गई।
    और हाँ, यह सच है,
    कि मैं बदल गई।
    ©rolytiwari