• prerana_dr30 10w

    अकेला ही चला गया

    शहरों- गलियों के शोर में था मैं
    मैं मशहूर था इतना मुझे अंदाज़ा न था
    निकली मय्यत मेरी सब खिड़कियों से झांक रहे
    फूलों से सजा मेरा ही ज़नाजा न था।

    जहां में आया जब से
    ख्वाहिशें ज़िंदगी की बढ़ती गईं
    पीछे मुड़कर देखने का इरादा न था
    अलविदा कहने का किया वादा न था।

    अपना किरदार निभा रहा था
    दिलों में घर बना रहा हूँ खबर न थी
    हज़ारों लाशों - कफ़नों के बीच मैं भी था
    लेकिन मुझ जैसी तनहा कोई कब्र न थी ।

    यूँ तो घिरा रहता था
    शोर में ,चकाचौंध में,लोगों के हुजूम से
    आज सब उस मोड़ पर छोड़कर चला गया
    जहां से मुड़ नहीं सकता, अकेला ही चला गया ।।
    ©prerana_dr30