• ssaher 9w

    बाल दिवस है आज, चलो बचपन मे चलते हैं।
    खिलोने और पैसो के लिये, भाई बहनो से लडते हैं।
    कागज का जहाज़ बना कर्,दोस्तो साथ उड़ते है।
    पानी मे नाव तैराकर,कीचड मे चलो गिरते है।
    गले मे बोतल लटकाकर, बैग मे किताब भरते है।
    छोटे छोटे कदमो से हम, स्कूल कि ओर बढ़ते है।
    कविता कि किताब खोलकर, 'मछली जल की रानी' पढ़ते है।
    रंग-बिरंगे फूल् तोड़ कर, तितली को पकड़ते है।
    खड़ी दोपहर मे दौड़कर, सूरज संग चलते है।
    पापा- मम्मी, दादा-दादी से, चलो आज फिर डरते है।
    प्यारी-प्यारी बातो से, सबके मन को हरते है।
    बाल दिवस है आज, चलो बचपन मे चलते हैं।

    Saher Faizabadi 'Saher'