• meri__aarzoo 22w

    यक़ीनन तुम बहुत क़रीब हो मेरे..
    मेरी कविताओं.. शब्दों में छुपे हो मेरे।
    गुम हो तुम मुझमें इस क़दर...
    बिन गजरे ही आँखों से बरसते हो तुम मेरे।
    मैं ख़ुद ही तुम को खोया खोया रखती हूँ...
    ना जानें क्या होगा जब तुम जानोगे तुम क्या हो मेरे।
    मैं बैठी बैठी अक़्सर तुमको सोचा करती हूँ...
    ना जाने तुम ऐसे कैसे रह लेते हो बिना मेरे।
    मैं मक़बूल हूँ एक तुम्हारी ही वज़ह से...
    मेरी हर फ़रियाद... शामिल हर दुआ में हो तुम मेरे।
    -मनी
    ©_manii_