priyastarkgold

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Instagram- priyastarkgold Facebook- Priya Stark Gold a gregarious and an above board girl in nature..

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Reposts
  • priyastarkgold 4w

    2020
    Amor❤️


    ये इश्क़ वाली फ़रवरी कुछ तन्हाई दे गई, मेरी उल्फत को यूं ही जुदाई दे गई...
    कुछ अनकहे और अनसुने से रह गए थे लफ़्ज़...
    बदल गया ये वर्ष हम आबाद हो गए, मोहब्बत की खुली हुई किताब हो गए...
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  • priyastarkgold 4w

    Amor❤️

    तुम्हारा मेरे साथ होना उतना ही खूबसूरत लगता है जितना कि उस चांद का आधा हिस्सा बादलों के बीच ढका होना...
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  • priyastarkgold 7w

    बेटी♥️

    मैं बेटी हूं, मैं क्या करूं...?
    दहेज और समाज की घिनौनी हरकतें भूल, मुझे प्यार से घर में रखो पापा...
    विनती है भैय्या तुमसे, लाज़ बचाने, रक्षा करने, की नौबत हम  बच्चियों पर मत डालो...
    बेटी, बहिन या मित्र समझ, समाज में हमें चैन से जीने दो...
    हम हां तुम्हें गर ना बोले, तो हमारा गुरूर समझ तेज़ाब की छीटें हम पर मत डालो...
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  • priyastarkgold 9w

    7 Year's Love♥️

    इक अज़ब से इश्क़ की कड़ियां हैं हम दोनों...
    बेपनाह इश्क़ और नोंक - झोंक का मिश्रण हैं हम दोनों...
    सप्त वर्ष यूं ही निकल गए आज की तारीख में...
    लोग तो अब ये भी कहने लगे... दो जिस्म और एक जान हैं हम दोनों...
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  • priyastarkgold 9w

    Amor♥️

    महसूस तो एक अरसे पहले किए थे तुम्हें...
    अब तो सिर्फ़ कोरा कागज़ भरते हैं तुम्हारी कल्पना से...
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  • priyastarkgold 10w

        औरत♥️

              
    हम आदमियों की औरतों से क्या तुलना है साहेब...
    आदमियों का विस्तार एक से शुरू हो, अनंत से कुछ कम ही पर अंत हो जाता है...
    लेकिन औरतों का विस्तार एक से शुरू हो, कई बार शून्य अवस्था होने के बाद भी अनंत हो जाता है...
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  • priyastarkgold 12w

    करवाचौथ

    ऐ चांद... आज औपचारिकता की वजह से तुझे शबाब मिला है...
    वरना तू खुद देख... फ़ीका तो तू आज भी है मेरे चांद के आगे...
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  • priyastarkgold 14w

    Amor♥️

    तुमने इतने मजबूत धागों में क्यों पिरोया था मुझे, जब मैं उलझी हुई पुलिंदा थी...
    मानते हैं... अपने रिश्ते के धागे कच्चे थे, पर कम से कम मेरी ज़िंदगी का अजल, अज़ल के बाद रखते...

    पुलिंदा - कागजों का समूह, अजल - मृत्यु, अंत
    अज़ल - जन्म, शुरुआत
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  • priyastarkgold 16w

    स्थूल

    गर ज़िंदगी के कठिन उतार - चढ़ाव से परेशान हो, तो उस दर्द से अंजान हो जाना...
    रो लेना तुम दिल से, मगर स्थूल में पड़कर, कभी तुम सूक्ष्म रास्ते मत जाना...
    ख़ुद नया रास्ता खोज लेना या वक़्त पर छोड़ देना...
    अपने मां - बाप के रहते, कभी जिन्दगी से हार मत जाना...
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  • priyastarkgold 19w

    उत्साह

    ऐ दोस्त...
    जिन्दगी के सबसे कठिन सफ़र से, कभी नाराज़ नहीं होना...
    दिल बहके भी अगर ग़लत रास्ते पर, तो जान से कभी उन्माद नहीं करना...
    बहुत हो जाए अगर, तो हालात वक़्त पर छोड़, परेशान नहीं होना...
    जिसने खुद की परवाह किए बिना पाला है तुम्हें, उसे कभी तबाह नहीं करना...
    ©priyastarkgold