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  • puru_thesoulful_writer 19w

    Father's Day

    जैसे माँ एक मकान को मोहब्बत से घर बनाती है
    ठीक वैसे ही उस घर के टीके रहने के लिए पिता खुद को साहस से आधार बनाता है।

    माँ घर के आंगन में लगे तुलसी के पेड़ की तरह है
    जो खूबसूरती के साथ संस्कार सिखाती है
    और पिता इस खूबसूरती को बरक़रार रखने के लिए
    चुपचाप खून पसीने से सींचता है।

    माँ की ममता ,पिता का साहस
    मिलकर ही कहीं एक घर बसता है।
    ©पुरुषोत्तम सिंह
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 20w

    हौसलें, दरिया समंदर लेहरों के आगे झुकते नहीं, ये बात बताई हमने
    मुसीबतें ठहरे अना- परस्त, उनको सही औकात दिखाई हमने
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 21w

    ऐ ख़ुदा वो ढूंढता किसे
    हारा था खुद से वो मिलता किसे

    कुल मिला कर 1277 जानने वाले थे उसके
    रखती किस से वास्ता कौन समझता उसे

    जो हँसती थी हरेक बात पे, इक पल में नाता तोड़ लिया
    ज़िन्दगी से ये कह कर, उसके होने न होने से फर्क पड़ता किसे

    वो जो शब्दों से चित्र बनाती थी कोरे कागजों पे
    उसके अंदर की कविता मर रही थी,कोई तो लिखता उसे

    तेरे होने से फर्क पड़ता था, न होने से फर्क पड़ रहा
    काश तू सुनती और मैं कह पाता तुझे
    ©पूरुषोत्तम सिंह
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 21w

    गाँव की दरकार है

    शहर के भीड़ में अकेलेपन की पुकार, चले आओ गाँव की दरकार है
    चार मंजिले ईमारत से झांकती खिड़की की पुकार, चले आओ गाँव की दरकार है

    पायल कर रही पुकार, चले आओ पाँव की दरकार है
    मन का धुप हार कर बैठ गया, चले आओ छाँव की दरकार है
    मैं माझी मज़बूरियों के समंदर में उतर तो गया
    पत्थर दिल अब डूब रहा, चले आओ नाँव की दरकार है
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 22w

    हैं ख़्वाहिशें बड़ी-बड़ी, चुनोतियों से कौन डरे
    क्या पाप क्या पुण्य , है सब घड़े भरे
    था लिखा जो लकीरों में मिटा दिया सभी को
    है काल भी नाखुश यहाँ, बिन जिए जो मरे
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 22w

    बोझ के गठरी संग है मीलों चलना
    ऐ ख़्वाब रात की चादर ओढ़े कल आना
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 25w

    मैं चाहूंगा कि
    लोग मुझसे आ कर मिले
    मुझसे बातें करे,
    अच्छी या बुरी ,पर करें।

    गर मोहब्बत हो तो
    इजहार करें
    और जो नफ़रत तो
    इंकार करें।

    मगर ये सब तब करें
    जब मैं ज़िन्दा हूँ।

    मेरे मरने के बाद
    कोई ये ना कहे के
    आदमी अच्छा था,
    न मुझसे झूठी मोहब्बत दिखाये
    न सच्ची हमदर्दी।

    क्योंकि मरने के बाद
    मैं किसी को हासिल नहीं होने वाला।
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 26w

    मुझे चाय पसंद नहीं
    क्योंकि , चाय के साथ
    सिर्फ तुम्हारी बातें नहीं होती
    और चाय पीने वाले वक़्त के साथ
    अपनी पसंद भी बदल देते हैं।

    मुझे न शराब पसंद है
    क्योंकि, शराब के साथ
    सिर्फ तुम्हारी ही बातें होती है
    इसमें कोई मिलावट नहीं होती है।

    और मैं शायर बदनाम हूँ
    जिससे न शराब छूटी,
    न तुम्हारी आदत।

    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 28w

    प्रेम
    कभी दो ,एक जैसे लोगों के बीच नहीं होता।

    जरूरी नहीं है कि आप दोनों की पसंद एक हो
    हमे बस इक कड़ी की जरूरत होती है, जो दोनों को जोड़ सके

    जैसे मुझे सिगरेट पसंद है
    और उसे कोल्ड कॉफी

    पर "चाय" हमारे बीच की कड़ी है जो हम दोनों को जोड़ती है।

    हाँ ,
    ये बात और है की चाय
    हम दोनों को नहीं पसंद।

    प्रेम एक बदलाव है और
    समय के साथ सब बदलते है।
    ©puru_thesoulful_writer

  • puru_thesoulful_writer 29w

    गाँव छोड़ा शहर के खातीर, पर चार दीवारों में ,कट रही है ज़िन्दगी
    माँ-बाबूजी ने कहा था अनमोल हूँ, पर सस्ते भावों में, कट रही है ज़िन्दगी

    फकीरों के आँगन में खिलखिलाते देखा है मगर
    अमीरों के चोखट पे नंगे पाँवों में, काट रही है ज़िन्दगी
    ©puru_thesoulful_writer