radhika_1234569

listen to the simple wisdom inside you

Grid View
List View
Reposts
  • radhika_1234569 4d

    सुकून तो इतना सस्ता है जनाब
    वो हमे चाय से भी मिल जाता है


    महंगा तो आपका वक़्त है जो
    तारीखों में अक्सर बदल जाता है !!






    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 1w

    बड़ा बेजान सा लगता है ये दिल ♥️
    कभी तुमने ही कहा था अपना ख्याल रखना

    पर कैसे ?







    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 2w

    देखो ये तारे दूर होकर भी पास है
    और एक तुम साँसों में बसे हो
    फिर भी मेरे सोच के पार हो !!!!!








    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 2w

    हर दफ़ा लगता है जैसे तुमने हमे पुकारा है

    बिना किसी आवाज ये कैसा हमे इशारा है?







    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 3w

    ज्वार - भाटा सा है तुम्हारा आना

    जब भी आते हो उफ़ान लाते हो !!









    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 4w

    दिल के रिश्तों में दिमाग ना लगाओ
    मीठी शहद पर तुम नीम ना चढ़ाओ !!











    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 4w

    Random thought ☺☺☺

    Read More

    coffee

    दो रुपये की कॉफ़ी में भी मेरी शाम गुजर जाती है

    Starbucks की कॉफ़ी से हिसाब बिगड़ जाती है





    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 4w

    हर बात भूल जाए ये कदापि संभव नहीं
    हारी बाज़ी को जितना भी असंभव नहीं,

    मंजिल आज नहीं तो कल मिल जाएगी
    दौर संघर्षो का सफलता निकट आएगी,

    शतरंज सा जीवन उलझे मोहरो से भरा
    कब, कँहा ,कैसे जीते ये पता नहीं कँहा,

    शख़्स और वक़्त को याद जरूर रखना
    वक़्त का पहिया है हिसाब जरूर रखना,

    सब्र को कब्र तक ,ना ले जाना मेरे दोस्त
    बिन बुलाये अब्र से जीत जाना मेरे दोस्त,



    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 5w

    मगरूर हूँ तो
    हाँ हूँ जनाब !
    इतना हकदार
    रखती हूँ !
    अगर बात
    सम्मान की हो !
    तो सिरआँखों पर
    आन रखती हूँ !



    ©radhika_1234569

  • radhika_1234569 5w

    #शादी #ब्याह #mirakee

    एक ब्याह ऐसा, जँहा पैसों का ना व्यपार है
    सादगी में भी देखा, दुल्हन का रूप तैयार है
    कच्ची हल्दी,दूध से दमका दमका निखार है
    काजल,बिंदी,लाली से सुन्दर रूप निहाल है,

    काँच की लाल चूड़ी, मेहँदी से रचाई हाँथ है
    आलता,पायल,बिछियां से पैरों का श्रृंगार है
    पियरी साड़ी,गजरा गले में गुलाब का हार है
    माँ दुर्गा की चुनरी से ही देखा घूँघट तैयार है,

    ढ़ोलक,शहनाई , संग मंडली का सुर ताल है
    बुंदिया,पूरी,सब्जी से खुश हुआ मन आज है
    ना दिखावा ना चिंता हर चेहरे पर मुस्कान है
    देख आमंत्रण पत्र जँहा निमंत्रण सपरिवार है,

    ना लाखों का खर्चा, ना चकाचौंध की बात है
    जो लाखों में ना मिले यँहा इज़्ज़त सम्मान है

    Read More

    ब्याह

    ©radhika_1234569