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Reposts
  • rajni_pant 16w

    आँखें

    ये आँखें बेजुबान की जुबान हैं
    बिना बोले सब कुछ बता देती हैं।
    बिना कहे सबकुछ समझा देती हैं,
    कभी करुणा, कभी प्रेम, कभी गुस्सा तो कभी तिरस्कार।
    कितना कुछ जानती और समझती हैं ये आँखें।
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 25w

    विनम्रता से ही नैतिकता आती है
    और
    जीवन में सादगी आती है !!!
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 30w

    पिता

    पिता, एक ऐसा व्यक्तित्व
    जिसकी गरिमामयी उपस्थिति ही
    परिवार के एकीकरण एवं स्नेह का पर्याय है
    जिसकी गंभीर गर्जना से पूर्ण आवाज
    अनुशासन का पर्याय है
    जिसका सूक्ष्म अवलोकन
    आपसी सद्भाव का प्रतीक है
    जिसकी निर्मल मुस्कान
    परिवार की संपन्नता का पर्याय है
    जो संपूर्ण परिवार को वटवृक्ष के समान
    आश्रय देता है।
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 31w

    आत्मनिर्भरता

    आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है
    जब हमारी बीमारी मे दूसरे हमारी मदद करते हैं,
    जब QUARTINE PERIOD. मे दूसरे हमारी आवश्यकता की पूर्ति करते हैं ,
    जब हम अपनी छोटी -छोटी आवश्यकता की पूर्ति के लिए जानकार पर निर्भर रहते हैं,
    क्या सही मायनों में हम आत्मनिर्भरता का दंभ तो नहीं भर रहे?
    वस्तुतः
    वास्तविक आत्मनिर्भरता तो तब है जब हम
    दूसरों की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर सकें,
    स्वयं सन्मार्ग के आचरण के साथ दूसरों को भी प्रेरणा दे सकें
    आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वावलंबी बनाकर,
    लोगों के जीवन में खुशियां बाँटकर
    सही मायनों में जियो और जीने दो की भावना ही
    आत्मनिर्भरता है
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 34w

    आओ ! चलें जंगल की ओर
    प्रकृति की ओर
    प्रकृति से दूरी ही
    आज हमें अपनों से दूर कर रही है ।
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 34w

    क्यों होता है जरूरी
    रिश्तों को कोई नाम देना
    बेनाम रिश्तों की भी अहमियत है
    क्योंकि
    गहराई में डूबे कई रिश्ते
    अक्सर बेनाम होते हैं! !!

  • rajni_pant 35w

    भ्रमण

    कुकूछीना की याद आ गईं

  • rajni_pant 35w

    भ्रमण

    घूमने जा नहीं सकते, आओ ! घर बैठे ही जंगल की सैर का आनंद लें

  • rajni_pant 36w

    माँ

    हे माँ ! नमन तुझे
    तेरा है उपकार बड़ा
    संसार का दर्शन कराकर
    बोलने का अभ्यास कराकर
    उचित -अनुचित मे भेद बताकर
    उॅगली पकड़कर सन्मार्ग में चलना सिखाकर
    ममता के आँचल में छिपाकर
    स्नेह का अमृत पिलाकर
    सद्ज्ञान का उपदेश देकर
    जीवन समर का पाठ पढ़ाकर
    संपन्न तुमने हमें बनाया है।
    प्राणि जगत की प्रत्येक मातृसत्ता को नमन !!!
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 38w

    Remember that schools are not closed.
    SCHOOL BUILDINGS
    are closed.

    The teachers and students are working harder than ever.