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  • ranasunidhisingh 1d

    नादान थी, कोई कृष्ण जैसा का स्वपन सजाई थी,
    नादानी हैं, रुक्मिणी बनकर भी राधा बनने की आस लगाई हुं ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 1d

    तेरी हि तो आरती गा रही हुँ,
    पर राधा नही मीरा बनकर ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 1d

    इस संसार मे खुद के लिए कृष्णा खोज रही थी,
    पर मैं तो मीरा भी न बन पाई
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    पिया जी, अब तेरे साँसो मे घुलना हैं मुझे,
    अब तेरे झंकरो मे बहना हैं मुझे,
    अब अपनी चाहत कहना हैं मुझे ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    न जाने तेरे ये चाहत के छीटे,
    मेरे धड़कन मे इश्क का आग क्यों जला रहे है ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    तेरे ईश्क का रंग इतना ही गहरा चढ़ा है की,
    सतरंगी भी फीका लग रहा है मुझे ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    इस सावन, तेरे नाम की मेहंदी रचाई हूँ,
    तुझे अपनी चाहत मे भिगोने का ख्वाब सजाई हूँ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    सावन की हर एक बुँदे बदन को चूम रही हैं,
    तेरे प्यार मे तो आज धड़कन भी झूम रही हैं ।
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    Don't stitch, do embroidary.
    P. S. - that can make torn relations change into masterpiece.
    ©ranasunidhisingh

  • ranasunidhisingh 2w

    कुछ फासले तेरी फितरत ने लाएं,
    और कुछ फासले अब मेरी हसरते लाएगी ।
    ©ranasunidhisingh