rangkarmi_anuj

(©अनुपात एवं ©आधा-१/२)*

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  • rangkarmi_anuj 7h

    मगर गौर करो
    उनकी खामोशी और हँसी
    इज़हार करती हैं
    ©rangkarmi_anuj

    @neha_loveless ji ������������ आपकी फ़रमाइश पर कुछ अल्फ़ाज़ मेरे भी #poetry #thoughts #diary #love #friendship

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    मगर गौर करो
    उनकी खामोशी और हँसी
    इज़हार करती हैं
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 7h

    कश

    देखो हर तरफ
    सफेद धुएं का बादल
    कुदरत का नहीं है
    वो ज़हरीला है बहुत
    जो पीता है उसका
    जो नहीं पीता
    उसके लिए भी

    बच्चे बच्चे सोख रहे
    गली नुक्कड़ में
    छुपकर चोरी से
    मज़े ले लेकर
    नासमझ बन कर
    उम्र घट रही है
    कब तक जी पाएंगे

    मौत का चुम्बन
    जानबूझकर खुद करते हैं
    इल्ज़ाम ईश्वर पर थोपते हैं
    कहते बड़ा बेरहम है
    इतनी जल्दी बुला लिया
    खुद की गलती
    पर्दा डालते हैं

    रोक लो रोक दो
    कश को तुम
    वक़्त है अभी
    सुधरो और सुधारो
    इंसान हैं सभी
    नहीं तो मरो ऐसे
    घुट घुट कर तुम
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 9h

    बाज- कर, टैक्स #poetry #thoughts #diary #life

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    बड़ी मुद्दत से हँसने का मौका मिला है
    क्या मेरे अब हँसने पर भी बाज लोगे
    नही जाना मुझे तुम्हारे साथ कहीं भी
    क्योंकि तुम मुझे फिर से दगा ही दोगे
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 1d

    आग है

    आग है मेरी गली में
    जल रहा तू दूसरी गली में
    बता तेरी राख कहाँ है
    मैं ढूंढ रहा तुझे अपनी गली में
    चीखते रास्ते कह रहे हैं
    आग है मेरी गली में

    चौराहे शोर गुल में गुम गए
    घर के दरवाज़े खुद कैद हो गए
    आगजनी हो रही अपनो में
    सिर गिर गए मंदिर मस्जिद में
    छोटे बच्चे रोते हुए कह रहे
    आग है मेरी गली में

    बंदूक तलवार से खेल रहे हैं
    अपने पुराने त्यौहार को मिटा रहे हैं
    घृणा कर रहे मित्र की सेंवइयाँ से
    कीड़े ढूंढ रहे हैं यार की गुजिया में
    अम्मी माता भी रो कर कहती
    आग है मेरी गली में

    दिन बीत रहे हैं दहशत में
    रात गुज़र रही घबराहट में
    चप्पा चप्पा गूंज रहा है
    बम बारूद के धमाकों से
    भारत माँ हाथ जोड़ कर कह रही
    आग है मेरी गली में
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 2d

    थैले में विद्या
    अभाव है बस्ते का
    अधूरी सामग्री बंट रही
    हाल बेहाल है शिक्षा का
    यह दर्द मेरे साथ
    यह दर्द है इस बच्ची का

    फटे हुए कपड़े
    बहुत दुख देते हैं
    उधड़े हुए धागे
    नज़र झुका देते हैं
    कसूर है आखिर किसका
    यह दर्द है इस बच्ची का

    फ़टी छोटी एड़ी
    बद्दतर हालत शरीर की
    दंग रह जाए सरस्वती
    देख स्थिति बच्ची की
    साथ छूट रहा विश्वास का
    यह दर्द है इस बच्ची का

    दिल पसीज जाए
    गांव में देख नज़ारे को
    मुँह से उफ्फ निकलेगी
    जब देख लेंगे गरीबी को
    क्या यही है भविष्य भारत का
    यह दर्द है इस बच्ची का



    छायाचित्र- अनुज शुक्ल

    गांव में यह हालत है शिक्षा की बहुत दुख हुआ यह देख कर ���� #poetry #thoughts #diary #nature #life #travel

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    अधूरी सामग्री

    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 3d

    कश

    जल तो गई
    जला धीरे धीरे रही
    खो जाने के लिए
    डूब जाने के लिए
    एक एक कश में
    सिफ़र बनते हुए

    आंखे भारी भारी
    बोलने का लहज़ा ऐसा
    सारी सल्तनत के मालिक
    अपने आप में नहीं
    बोलती तो कश है
    मामूली सी कश

    बदहाल हो गए
    पर गुमान नही गया
    जेब खाली बिन पैसे
    पर एक कश चाहिए
    ज़मीन पर अध जली
    जैसे अमृत मिला

    जिस्म एक है
    एक बार मिलता है
    उसे भी जला रहे
    खोखले हो गए हैं
    आधे मर चुके हैं
    पर लत से मजबूर
    उनके लिए ज़िंदगी नहीं
    कश कीमती है
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 3d

    बिखर सा गया हूँ कतरे कतरे
    खुदको जोड़ने में दर्द बहुत है
    आहिस्ता आहिस्ता सांस चुप हो रही
    दो बोल कहना चाहता हूँ धीरे धीरे
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 4d

    इसपर कभी सोचा है, नही तो ज़रूर सोचिए �������� #poetry #thoughts #diary #life #nature

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    जूठन

    अनाज तेरा मेरा
    संघर्षों से घिरा हुआ
    बनने से पहले
    और बाद में भी
    हर वर्ग की भूख
    बेझिझक मिटाता है

    मनुष्य ही नहीं
    जानवर भी अन्न खाते
    बचा खुचा गंदा
    खास बात यह है
    मुँह नही बनाते हैं
    क्योंकि भूखे हैं

    इस संसार में
    कोई खा रहा है
    फेंक रहा है
    कोई चुरा रहा है
    मर भी रहा है
    किसान बेबस हैं

    जनता खूब हैं
    अन्न कम हैं यहां
    चोर ज़्यादा हैं
    थाली का दर्द यह
    जिसे मिलना चाहिए अन्न
    वो जूठन खा रहा है

    जूठन कौन खाया
    हर एक जीव ने
    मनुष्य भर नहीं
    क्योंकि अनाज सबका है
    बस मिल नहीं पाता
    सुविधा भोगियों की वजह से
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 5d

    तुम प्रकृति

    तुमको मैं
    प्रकृति में ढूंढता हूँ
    अपने हर सफर में
    नई जगह पर
    तुम्हारी खोज करता हूँ
    बहती हुई नदी में
    तुम्हारा अक्स देखता हूँ

    क्योंकि
    तुमको मैं
    प्रकृति में ढूंढता हूँ

    रास्ते से गुज़रते हुए
    लहराते हुए खेत देखके
    और उन्हें झूमते हुए
    फिर तुमको याद करके
    आँख अपनी बन्द करके
    बीते हुए पल में
    तुम्हारी शरारत देखता हूँ

    क्योंकि
    तुमको मैं
    प्रकृति में ढूंढता हूँ

    पेड़ के पीछे छुपते
    सूरज की तरह हो
    जैसे देखकर अचानक से
    खुद छुप जाती हो,
    पहाड़ों से उतरे हुए
    झरने की तरह हो
    प्रकृति से प्रेम है
    इसलिए प्रकृति को लिखता हूँ

    क्योंकि
    तुमको मैं
    प्रकृति में ढूंढता हूँ
    ©rangkarmi_anuj

  • rangkarmi_anuj 5d

    #Challenge @ruhii_ जी यही लिखा और ऐसे ही लिखते हैं ���������� #poetry #thoughts #diary #life #nature

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    ©rangkarmi_anuj