rani_shri

बत्ता है तू बत्ता������

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Reposts
  • rani_shri 17h

    हर बार तुमसे ही इश्क होता है..

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    ना मुझसे इश्क किया
    न मुझे ही किसी और से इश्क करने दिया,
    कुछ ऐसा ही मेरा वो इश्क है..
    ©rani_shri

  • rani_shri 19h

    तू दे या न दे मुझे मगर,तुझपे अब हमारा तो हक हो चुका,
    कि अब तो अंजाम चाहे जो भी हो,हमें तो इशक हो चुका।
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    ज़माने को गुज़रे ज़माने हो जाते हैं
    लेकिन गुज़रती है जो दिल पे,
    वो हर ज़माने ताज़ा ही गुज़रती मालूम होती है..
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    क्यों खुश रहें कि यहां तो खुशी थोड़ी कम है,
    गर ज़िंदगी में ये गम ना हीं रहें तो क्या गम है।
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    बदल जाती है जो अक्सर वो अपने ही हाथ की रेखा है क्या?
    काग़ज़ के बने फूलों पर कभी भंवरों को बैठते देखा है क्या?
    ~श्री

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    अंधेरों से परे होकर भी कोई सवेरा न हुआ,
    जो बेशक मेरा है फ़िर क्यों वो मेरा न हुआ।
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    @syaahiii this one is for you, my little admirer..
    Loads of loves����❤❤♥️♥️������

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    मंज़िल की ओर चलें अगर
    तो राह में हमराही सी तुम।

    ख़ुदा ने जो कर दी हो पूरी
    मुराद वो मनचाही सी तुम।

    हर इल्जाम से बचाती हुई
    किसी सही गवाही सी तुम।

    शहर में हमारी बदनामियों
    में होती वाहवाही सी तुम।

    दिल-दिमाग में ख़्यालों की
    होती आवाजाही सी तुम।

    मनमानियों पे रोक लगाए
    लगती हो मनाही सी तुम।

    अपनी ही ताकत से लाती
    दुनिया में तबाही सी तुम।

    मेरे कई संगीन गुनाहों की
    कोई एक बेगुनाही सी तुम।

    जहाँ खोजा ख़ुदा को मैंने
    मिली सदा वहां ही सी तुम।

    किसी तकरार की बात में
    होती हमेशा ना ही सी तुम।

    किसी इज़हार में दिल से
    पूरी होती हाँ ही सी तुम।

    किसी पन्ने को पूरा भरती
    कलम की 'स्याही' सी तुम।
    ©rani_shri

  • rani_shri 2d

    ये ज़िंदगी लगती किसी काश की तरह,
    मानो कोई रूह किसी लाश की तरह।
    ©rani_shri

  • rani_shri 2d

    किसी की बातें और ज़िक्र दिल धड़काने लगे तो समझना के इश्क है
    के जब सावन भिगाने से ज्यादा सुलगाने लगे तो समझना के इश्क है...

    लब हंसे मगर अश्क आंखों को भिगाने लगे तो समझना के इश्क है
    के दीदार पर जब खामोश लब थरथराने लगे तो समझना के इश्क है...

    किसी को सोचना ख़ुद को ही गुदगुदाने लगे तो समझना के इश्क है
    उससे दूर जाने की बात ज़्यादा ही डराने लगे तो समझना के इश्क है...

    विरह की आग ज़रूरत से ज़्यादा जलाने लगे तो समझना के इश्क है
    दिन और रात हरदम मद्धम तराने सुनाने लगे तो समझना के इश्क है...

    शब ओ शाम की बातें भी कम पड़ जाने लगे तो समझना के इश्क है
    इश्क का सही मतलब समझ आने लगे 'रानी' तो समझना के इश्क है...
    ©rani_shri

  • rani_shri 3d

    This one is for my most favorite writer ever over here on mirakee.
    I'm a true lover of your writings in the truest senses.
    The first dedication for you from my heart..
    I hope you'll like it @abhi_mishra_ ,
    I have always admired you and your writeups. They're inspiring in all the aspects which touches the deepest heart. Here in this poetry, i have considered you as a pro writer and myself as a noob reader.. ❤❤

    Also this post is a reminder for you to write more and more..

    वलय- ring
    अनुनय - request
    मय -wine
    प्रलय- destruction

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    आप स्वतंत्रता के दाता स्वामी से हैं
    हम सदैव अधीन करते वलय से हैं।

    आप सदैव नवीनतम निर्माण से हैं
    हम प्रति क्षण होते एक प्रलय से हैं।

    आप सुन्दरता से व्यतीत क्षण से हैं
    हम विश्रामाधीन किसी समय से हैं।

    आप सर्वत्र व्याप्त होते विजय से हैं
    हम विजय में भी होते पराजय से हैं।

    आप स्थिर आधारभूत विचार से हैं
    हम अस्थिर आधारहीन निर्णय से हैं।

    आप शान प्रकट करते आदेश से हैं
    हम तुच्छ हीन लघु से अनुनय से हैं।

    आप सुन्दर वाणियों के स्वामी से हैं
    हम सुरहीन केवल किसी लय से हैं।

    आप एक सुन्दर स्वरूप यौवन से हैं
    हम कुरूप यौवन एकदम तय से हैं।

    आप स्वयं में संपूर्ण सी वीरता से हैं
    हम स्वयं में ही भयभीत भय से हैं।

    आप मस्तक के एक अभिषेक से हैं
    हम स्वयं पर विराजमान मय से हैं।
    ~श्री

  • rani_shri 4d

    ख़ुद ही दे कर ख़ुद ही छीन लेता है
    ऐ ख़ुदा! तू तो ख़ुद के ही फ़ैसले पर ठीक से कायम नहीं।
    ©rani_shri