ritbikstagram

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Amateur Poet | Keen Reader| Bihari | Navy B.Tech( Marine Engg.) DMET'23 (Indian Maritime University, Kolkata Campus)

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Reposts
  • ritbikstagram 40w

    बस कलम से नाराज़गी नही
    पूरा बाज़ार रंगीन मिज़ाजी हुआ था हमें टूटता देख
    उसने काले अक्षर से ज्यादा कुछ फरमाया नही।
    ©ritbikstagram

  • ritbikstagram 48w

    were you with me,
    I would have unveiled my bluish veins
    I would have written how deep things feel
    to the bone or only near to flesh,
    were you with me,
    I would have never devastated my pen,
    the pen just defining
    carcass of emotions!
    ©ritbikstagram

  • ritbikstagram 48w

    बस तुम्हारे साथ अदब से पेश आते हैं,
    जमाने को जहनुम्म, बस तुम्हें फ़िरदौस मानते हैं।
    ©ritbikstagram

  • ritbikstagram 50w

    बैठ जा तू थोड़ी देर साथ मेरे
    तो मैं जन्नत पा लूं,

    बन तितली यूं
    लिबास, जुल्फ,
    तुम्हारी आंखें, पग,
    नाराज़गी, बदसलूकी, आसूं
    मानो सब में बाग ढूंढ लूं।
    ©ritbikstagram

  • ritbikstagram 51w

    हाज़िर जवाब हुआ करते हैं सब अपने शहर में,
    ग़ुलाम खुद के बन बैठे हैं
    ना जाने कैसे इस शहर में।
    ना उस कलम को पता, ना इस ख़त को कुछ खबर
    चांदनी के नीचे बंदिशों की गुलामी कैसी होती
    शोर में सिसकियों की दोस्ती कैसी होती।
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  • ritbikstagram 51w

    and I can bet my anything over that.

    poets would have no finesse to create melody through words
    if they had someone who would sing their miserere!
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  • ritbikstagram 53w

    ना शब्दों से कुछ ख़ास दिलग्गी थी,
    ना शायरी में दिलचस्पी थी,
    बस उससे बात बिगड़ी थी।
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  • ritbikstagram 55w

    समय की अफरातफरी में कई सपने छूट जाते हैं,
    क्यूं इत्मीनान से नहीं बैठने देता ये जमाना
    बैठी होती है हमारी माशूका नज़रों के सामने
    हम हाथ मिलाने से भी चूक जाते हैं।
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  • ritbikstagram 56w

    ख़ामोश बैठा,सिसक रहा होगा,
    हमारा बचपना
    किसी कोने में बिलख रहा होगा।

    अब उससे कोसों दूर
    नशे की नुमाइश कर खुद को वाजिब बताते हो,
    सुकून चकाचौंध की शबाब को बताते हो।

    अकेलेपन से जब लबालब होते होगे
    पाखंड की मजमे में दौड़ कर जब थक जाते होगे
    किसी सुनसान सड़क पर तुम्हारे रूह का तमाशा बनता होगा,
    दिल बेख़ौफ़ धड़कता होगा, शायद रूह कांपता होगा।
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  • ritbikstagram 56w

    यूंही चांद चांदनी की नुमाइश नहीं करता
    हर रोज उसके हिस्से का आफताब सूरज उसे भेट दे जाता है।

    यूंही मेरी कलम तुम्हारी बातें नहीं करती
    हर रात मेरे हिस्से की स्याही तुम्हारी यादें भेट दे जाती हैं ।
    ©ritbikstagram