riyabansal

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  • riyabansal 25w

    आज दिल बहुत खाली है, रोने को कुछ आंसू है आँख में,
    हम एक बार फिर हार बैठे , ना जाने ये पूरी दुनिया कैसे है प्यार में। ।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 25w

    अरे पागल डर मत, हम प्यार आज भी बेहद करते हैं,
    बस फर्क इतना है, पहले मौत से करते थे अब खुदा से करते हैं।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 27w

    आज उन गलियों में फिर जाना हुआ,
    ना जाने कितनी पुरानी यादों का फिर आना हुआ ,
    अभी जाके तो उन ज़ख्मो से उभरे थे,
    उस बेवफा का अपने पुराने आशिक से फिर टकराना हुआ। ।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 27w

    सालों से खामोश हूँ, अब चुप नहीं रहा जाता,
    बहुत दर्द दे दिया यार, अब ये जख्म नहीं सहा जाता,
    कैद पंछी की तरह पूरी जिंदगी काट ली,
    तेरी बाहों में किसी और को देख कर, अब इस पिंजरे में नहीं रहा जाता।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 28w

    खामोश हूँ, पर देख सकती हूँ,
    जवाब मैं भी पलटकर दे सकती हूँ,
    अरे, तेरी झूठी वफ़ा के आगे पिघल जाती हूँ,
    वरना बेवफा बनकर मैं भी तुझे छोड़ सकती हूँ, ।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 28w

    सागर की कश्ती में कहीं दूर निकल जाऊं,
    तनहाईयों से लिपटकर खुद में ही खो जाऊं,
    कातिल ज़माना जीने नहीं देता,
    सोचा खुद को गले लगाकर ही थोड़ा सो जाऊं।।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 29w

    कोई बात नहीं कि तेरा साथ नहीं,
    कोई बात नहीं कि तेरे लोटने की अब कोई आस नहीं,
    हम जिया पहले भी करते थे,
    कोई बात नहीं कि तेरा इस हाथ में अब हाथ नहीं।।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 30w

    दिल . .

    तेरी आँखों को पढकर, तुझे पाने का दिल करता है ..
    इस चहरे को देखकर, पिंघल जाने का दिल करता है ...
    ना जाने कैसा घात किया है दिल पे...
    पहले तो आँख बंद करके किया करती थी, अब तो खुली आँखों से भी तेरे ख्वाब बुनने का दिल करता है ।।।।।
    ©riyabansal

  • riyabansal 30w

    Move on....

    While walking alone ,
    in between pebbles and stone ...
    I found a soul which is quite known ,
    and it sucks when it is pretending to be unknown...
    that pushes my heart in a dark zone,
    Huh, i need to move on!!
    ©riyabansal

  • riyabansal 30w

    तुम ..

    तुमसे मिलके ही सीखा कि इश्क क्या होता है ,
    वरना तो हम हर राहा चलते को दिल दे दिया करते थे ...
    तुम्हे देखकर ही अहसास हुआ वफ़ा क्या होती हैं ,
    वरना हम तो बेवफा से रिश्ते को ही फितूर काहा करते थे...
    तुम्हे जाना तो समझा चाहा क्या होती हैं ,
    वरना हम उन वीरानों में खुदा ढूंढ़ा करते थे...
    तुम्हे चाहकर ही लगा असल मे अपना कौन होता है ,
    वरना हम उन परायो मे अपनापन खोजा करते थे..
    तुम्हे पाया तो जाना सुलझी हुई जिंदगी क्या होती हैं ,
    वरना हम पहेलियों में ही उलझते रहा करते थे...
    ©riyabansal