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  • rjmanjeri 4w

    सत्य

    सुलगती रही मै रिश्तों की उधेड़ बुन में,
    क्या इन्हें बचाऊं या सुलगने दूं,
    सत्य की वेदी के साथ खड़ी हूं,
    अडिग पथ और विश्वास अटल है,
    कष्टों के कांटे बहुत है,
    लेकिन उनकी चुभन क्या,
    भला मुझे हिला पाएगी,
    मै हूं शक्ति सत्य की,
    दुर्गा सी तो कभी लक्ष्मी सी,
    नारी हूं कमजोर नहीं,
    मिट सकती हूं तो मिटा भी सकती हूं,
    उस परम सत्य के लिए,
    जो ईश्वर का रूप है,
    क्या प्राण क्या तन,
    तज सकती मै आज भी..।
    ©rjmanjeri

  • rjmanjeri 6w

    बेटी

    बिटिया परी सी
    नन्हीं कली सी
    बड़ी प्यारी प्यारी
    कोमल भली सी।।
    कभी जूही सी
    कभी चंपा सी,
    खिलखिलाती सी
    मुस्कुराती सी
    नाचती गाती गुड़िया सी,
    चहकती फुदकती चिड़िया सी,
    बाबुल के आंगन में तुलसी सी।।
    बिटिया परी सी
    नन्हीं सी कली ।
    बड़ी प्यारी प्यारी
    कोमल भली सी।।
    पायलों की रुनझुन सी
    चूड़ियों की खनक सी
    गुंजन फिजाओं सी
    ख़ुशबू हवाओं सी
    चंचल तितलियों सी।।
    बिटिया परी सी
    नन्हीं सी कली ।
    बड़ी प्यारी प्यारी
    कोमल भली सी।।
    वर्षा की बूंदों सी
    सीप में मोती सी
    आंखों में ज्योति सी
    दिल में धड़कन सी
    पलकों में सपनों सी।।
    बिटिया परी सी
    नन्हीं सी कली ।
    बड़ी प्यारी प्यारी
    कोमल भली सी।।
    नदिया की लहर सी
    झरनों की फुहारों सी
    इन्द्रधनुष के रंगों सी
    बासंती बयार सी
    बिटिया परी सी
    नन्हीं सी कली।
    बड़ी प्यारी प्यारी
    कोमल भली सी।।

    ©rjmanjeri
    12.10.2020

  • rjmanjeri 11w

    हिंदी

    हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

  • rjmanjeri 18w

    टूटता तारा

    टूटते तारे से अब मै कुछ मांगती नहीं,
    जो मांगा था वो उसने दिया नहीं,
    जब मैं उससे खफा हो गई,
    और उससे मै जुदा हो गई,
    एक रोज़ ख़्वाब में आया,
    मुझसे वो बोला,
    मै तो खुद ही टूट रहा था,
    इस टूटे दिल से पूछो,
    मै रोज़ तुझको देखता था,
    और तुम चांद को देखती थी,
    उस रोज़ मै प्यार का इजहार करने वाला था,
    तुमने चांद से कहा था कि तुम उसको चाहती हों,
    फिर तो मै टूट गया और तुमने मुझसे ही मांगा,
    क्या तुम मेरे पर क्या गुजरी समझ पाओगी।
    मै शून्य से उसे देखती रही वो चला गया।

    ©rjmanjeri
    20.7.2020

  • rjmanjeri 18w

    आओ

    आओ फिर से कुछ बातें करें,
    यूं फिर दो चार मुलाकातें करें,
    रात की खामोशियों को सुनने दो,
    चांदनी को जुल्फों पे बिखरने दो,
    आओ फिर से कुछ बातें करें....

    @Rj Manjeri Verma
    20.7.2020

  • rjmanjeri 18w

    मजदूर

    मजदूर ना जाने कितनी आस लिए गांव से आते हैं,
    शहरों के किसी तंग गली में वे बस जाते हैं,
    पौ फटते ही काम की तलाश में वो चले जाते है,
    नाके पर खड़े किसी के आने का वे इंतजार करते हैं,
    बनाते हैं घर किसी का, और खुद बेघर रह जाते हैं,
    दू जून की रोटी की भूख ,सर पर सूरज की तपिश सहकर,
    खून पसीने की कमाई को गुल्लक में बचाते हैं,
    सोचते है इस बार दिवाली पर घर जाएंगे,
    मुन्ना को घड़ी और घर की टूटी दीवार बनाएंगे,
    आफत आई महामारी की कि सब कुछ पीछे छूट गया,
    शहर काम गली की खोली और सामना भी छूट गया,
    कदमों पर करके भरोसा ,निकल पड़े गांव की ओर,
    कसम खाई अब ना आएंगे, शहरों की ओर,
    खेती बाड़ी करके ही ,कुछ थोड़े में जी लेंगे,
    अपनों का संग साथ रहेगा, कुछ हम खुश हो लेंगे,
    जीवन के इस कठिन समय में,करना है अपने पर विश्वास,
    सब कुछ संभव है ,जब अपने देंगे साथ।

    @Rj Manjeri Verma
    20.7.2020

  • rjmanjeri 20w

    पलक

    पलकों को मूंद कर, इक ख़्वाब सजाया हमने,
    फिर किसी को हौले से ,पास बुलाया हमने,
    वो लम्हा था करीब कि नींद ने सुलाया हमको।

    © Rj Manjeri
    8.7.2020

  • rjmanjeri 36w

    वायरस

    ऐ कॅरोना वायरस, तुम यहाँ क्यूँ आ गए,
    खुशहाल मेरा देश था ,क्यूँ काल बन तुम छा गए,
    देखना अब तुम खड़े , मेरे देश की अब एकता,
    हम हाथ धोएं बार बार, रखेंगे घर मे स्वच्छता,
    मास्क पहने हम सभी, सेनेटाइज करेंगे हाथ को,
    एक फिट की दूरी से ,हम करेंगे नमस्कार,
    भीड़ से हम बचेंगे , शुद्ध भोजन खाएंगे,
    बात मोदी जी की हर हाल में ,हम मानेगें अब देखना,
    है हमारे कर्णधार ,वो देश के नेता महान,
    ये कॅरोना सुन जरा ,तुम कान अपने खोल कर,
    ये नही तेरा जहां, ये देश हिंदुस्तान है,
    रहते जहां सब मिलजुल कर , इस देश की पहचान हैं।

    ©Rj Manjeri
    19.3.2020

  • rjmanjeri 37w

    टुकड़े

    जब भी दिल टूट कर बिखरता है,
    उनके टुकड़ों को मैं उठाती नही,
    उन टुकड़ो के दर्द भरे अहसासों को,
    महसूस करती हूँ दिल से,
    शायद मैं उनसे कुछ लिख जाती हूँ,
    जब बन जाती कोई नई रचना तो,
    समेट लेती फिर मैं उस दिल के टुकड़ों को,
    विश्वास से भर उठता मन कि ये मैं हूँ।

    ©Rj Manjeri
    15.3.2020

  • rjmanjeri 37w

    निगाहें

    हर वक़्त निगाहों से ना काम लिया कीजिये।
    कभी तो जुबां से बोलकर हमको बता दीजिए।
    ©rjmanjeri
    12.3.2020