rudraaksha

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Custom Officer loves Palmistry, Photography, Poetry , Bike riding

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  • rudraaksha 4d

    तुम एक ताबीज़ थी,
    मैं गले लगाए रखता था
    मैं इक लिबास जैसा ,
    तुम कभी कभी ही पहनती थी ।।

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    शून्य सा इश्क़ हो, तो बहुत अच्छा है
    ये गिनतियों की दौड़ हमको
    अकेलेपन में डूबो देती है।

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    मैं

    तुम एक ताबीज़ थी, मैं गले लगाए रखता था
    मैं इक लिबास जैसा , तुम कभी कभी ही पहनती थी ।।
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  • rudraaksha 2w

    मैंने लफ्ज़ को आग बनाया है
    भीतर बहुत भीतर
    सुलगती है रूह
    हर एक ख़्वाब जलाकर
    दफ़न होते खयालों का
    मैंने एक शमशान बनाया है ।
    हां मैंने लफ़्ज़ों को आग बनाया है ।।

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    आग

    मैंने लफ्ज़ को आग बनाया है
    भीतर बहुत भीतर
    सुलगती है रूह
    हर एक ख़्वाब जलाकर
    दफ़न होती ख्वाहिशों का
    मैंने एक शमशान बनाया है ।
    हां मैंने लफ़्ज़ों को आग बनाया है ।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 2w

    जिस्म पर लाख बैठी तितलियां
    मगर चीलों की भी नज़र थी
    कि कौन था ये शख़्स जिसको
    मौत भी आती नहीं है मरकर।।
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    रिहाई

    जिस्म पर लाख बैठी तितलियां
    मगर चीलों की भी नज़र थी
    कि कौन था ये शख़्स जिसको
    मौत भी आती नहीं है मरकर।।
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  • rudraaksha 3w

    रोज थोड़ा थोड़ा राख होता हूं
    आइना सामने रखता हूं
    और साफ होता हूं।।
    जला बैठा हूं जिस्म का हिस्सा
    जिधर दिल है
    तू मुझमें जाने कितनी है
    बहुत होता हूं तो मुट्ठी भर ख़ाक होता हूं।।।
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    राख

    रोज थोड़ा थोड़ा राख होता हूं
    आइना सामने रखता हूं
    और साफ होता हूं।।
    जला बैठा हूं जिस्म का हिस्सा
    जिधर दिल है
    तू मुझमें जाने कितनी है
    बहुत होता हूं तो मुट्ठी भर ख़ाक होता हूं।।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 3w

    मेरे ही पंख नोचकर तौबा करती है
    वाह रे दुनिया
    अपनी ही बेटियों का सौदा करती है ।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 5w

    कांटे जैसी

    हज़ारों तोहमतों की तो औकात क्या थी
    इक तेरी बात थी जो
    चुभ गई बहुत अंदर ।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 7w

    ये दुनिया

    रिवायत की बेड़ियों में
    घुटती ये दुनिया
    खुद की एड़ियों को
    नाहक ही घिसती ये दुनिया।
    खुद के घर में नहीं कोई सुनने वाला
    औरों के तमाशों पे हसती ये दुनिया ।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 8w

    बहुत मुश्किल है शहर को अपनी अहमियत बता पाना और उससे भी ज्यादा मुश्किल ये एहसास दिला पाना कि ये शहर आपका था l

    मैं इसी शहर का बाशिंदा हूं
    कितनी हसरतें
    कितनी नफरतें
    मगर आज भी जिंदा हूं।।
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    मालूम है

    मैं इसी शहर का बाशिंदा हूं
    कितनी हसरतें
    कितनी नफरतें
    मगर आज भी जिंदा हूं।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 8w

    तुम्हे जादू आता है , हां तुम्हे सच में जादू आता है । तुम कैद कर लेती हो मेरे बहते हुए ख्वाबों को , तुम बांध देती हो मेरे मन को एक छोटे से गलियारे में।
    काश तुम वक़्त को ठहरा सकती
    मै इस पल को ठहर ही जाता ।।❤️❤️❤️❤️

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    डायरी

    याद है तेरे गेसुओं का
    मेरी डायरी पे बिखर जाना
    मेरा एकटक तुम्हें निहारना
    और मोम सा पिघल जाना।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 9w

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    शहरी का शहर से रिश्ता बन जाना जायज़ है , मगर रुखसत के वक़्त कदम भारी हो ही जाते हैं।
    कोई कुछ छोड़ जाता है और कोई बहुत कुछ ले जाता है ।।



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    रेलगाड़ी

    बहुत चुभता होगा
    इस प्लेटफॉर्म को रोजाना

    एक रिश्ता भी है रेलगाड़ी से
    और कभी साथ भी नहीं जाना ।।
    ©rudraaksha