rudraaksha

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Custom Officer loves Palmistry, Photography, Poetry , Bike riding

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  • rudraaksha 9w

    घर

    ए घर
    हर रोज इक शख़्स ,
    तुम्हारे इर्द गिर्द अपनी ज़िन्दगी उधेड़ता है
    रात भर बुनता है
    और सुबह निकल जाता है , भीड़ में
    शाम को फिर कुछ खामियां, खुशियां
    तकिए के नीचे रखता है
    और कुर्सी पर ही सो जाता है।
    अकसर आईने से बात करता है
    तन्हाइयां पिरोता है,
    और दीवार पर टांग देता है।
    यही उलझ गया है वो ।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 23w

    सवाल

    मौत आती है जिस्म को, इस रूह को आती नहीं क्यों
    उड़ी है राख हवा में जो, ज़मीन पर आती नहीं क्यों ??
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 27w

    मेरा 400 वां पोस्ट
    बहुत शुक्रिया mirakee और सभी साथियों का जिन्होंने हमेशा सराहा और सिखाया ।।

    बहुत ख़ुदग़र्ज़ है दुनिया ज़रा देर से समझा
    तन्हा रह गया वो ठूंठ, पतझड़ देर से समझा ।।
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    @saba_rizvi @aparna_shambhawi @raaj_kalam_ka @succhiii @soulful #life #poetry #love #diary

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    सबक

    ए दरख़्त इस क़दर, इतरा मत तू
    ये परिंदे कभी किसी के होते नहीं हैं।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 29w

    घर से दूर शहर कितना भी हसीं क्यों ना हो , इक कसक रह जाती है , अपनों को गले लगाने की।।
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    घर

    इस दफा भी दीवाली,
    घर से दूर ही गुजरी
    "पेशा" हंसने लगा मुझपर
    तनख्वाह घूर कर गुजरी।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 33w

    जब सपने ही बागी हों
    दुनिया को बताना पड़ता है
    हर कोई यहां सुल्तान ही है
    हर महल जलाना पड़ता है ।
    जब तिनके हावी होने लगे
    मुट्ठी में दबाना पड़ता है
    अब कौन सा शख़्स दुश्मन है
    अख़बार मंगाना पड़ता है ।


    @succhiii @riya__ @soulful @anougraphy @hindikavyasangam @raaj_kalam_ka

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    बगावत

    जब सपने ही बागी हों
    दुनिया को बताना पड़ता है
    हर कोई यहां सुल्तान ही है
    हर महल जलाना पड़ता है ।
    जब तिनके हावी होने लगे
    मुट्ठी में दबाना पड़ता है
    अब कौन सा शख़्स दुश्मन है
    अख़बार मंगाना पड़ता है ।
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  • rudraaksha 33w

    बसर- गुज़ारा
    बशर - मनुष्य
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    उम्र

    पांव उम्र के कहां टिकते हैं
    इक ठौर कभी
    बसर होती है ज़िन्दगी
    बताओ बशर कैसे ??
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 35w

    ✍️✍️कहते हैं फकीरी में इश्क़ जोरदार होता है ।
    कोई विरासत , कोई रियासत और कोई सियासत नहीं होती ।
    सिर्फ दो शख़्स होते , कोई शिकायत नहीं होती ।♥️��
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    तेरे सिवा

    क्या है मेरा इक तेरे सिवा
    इक झोला
    एक तकिया
    दो खत और इक खटिया ।
    इक डायरी , दस नज़्में
    एक तस्वीर और कुछ ग़ज़लें ।
    तेरा चेहरा तेरी बिछिया
    तेरी नथ और इक बिंदिया।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 35w

    जो लिखने बैठूं तुझपे मैं
    तो कोई ग़ज़ल लिख दूं
    तेरे पांव के धागे को
    मैं तेरी पायल लिख दूं।।

    हुस्न की तारीफ हो अगर
    मैं तुझको कमल लिख दूं
    इश्क़ की उम्र पूछे जो
    मैं तुझको अज़ल लिख दूं।।
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    तिलिस्म

    जो लिखने बैठूं तुझपे मैं
    तो कोई ग़ज़ल लिख दूं
    तेरे पांव के धागे को
    मैं तेरी पायल लिख दूं।।
    ©rudraaksha

  • rudraaksha 37w

    तुम एक ताबीज़ थी,
    मैं गले लगाए रखता था
    मैं इक लिबास जैसा ,
    तुम कभी कभी ही पहनती थी ।।

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    शून्य सा इश्क़ हो, तो बहुत अच्छा है
    ये गिनतियों की दौड़ हमको
    अकेलेपन में डूबो देती है।

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    मैं

    तुम एक ताबीज़ थी, मैं गले लगाए रखता था
    मैं इक लिबास जैसा , तुम कभी कभी ही पहनती थी ।।
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  • rudraaksha 38w

    मैंने लफ्ज़ को आग बनाया है
    भीतर बहुत भीतर
    सुलगती है रूह
    हर एक ख़्वाब जलाकर
    दफ़न होते खयालों का
    मैंने एक शमशान बनाया है ।
    हां मैंने लफ़्ज़ों को आग बनाया है ।।

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    आग

    मैंने लफ्ज़ को आग बनाया है
    भीतर बहुत भीतर
    सुलगती है रूह
    हर एक ख़्वाब जलाकर
    दफ़न होती ख्वाहिशों का
    मैंने एक शमशान बनाया है ।
    हां मैंने लफ़्ज़ों को आग बनाया है ।।
    ©rudraaksha