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  • satish553 4d

    कृष्ण की चेतावनी :- रश्मिरथी

    वर्षो तक घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
    सह धुप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ ओर निखर!

    सौभाग्य न सब दिन सोता है, देख, आगे क्या होता है!

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,
    दुर्योधन को समजाने को, भीषण विध्वंस बचाने को,
    भगवान हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये!

    दो न्याय अगर तो अदा दो, पर, इसमें भी यदी बाधा हो,
    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धर्ती तमाम,
    हम वही खुशीसे खायेंगे, परिजन पर असि ना उठायेंगे!

    दुर्योधन वह भी देना सका, आशीष समाज की ले सका,
    उलटे, हरी को बांधने चला, जो था असाध्य, साधने चला!
    जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है!

    हरी ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरुप विस्तार किया,
    डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवन कुपित होके बोले-
    जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ, दुर्योधन! बाँध मुझे.

    यह देख, गगन मुझमे लय है, यह देख, पवन मुझमे लय है.
    मुझमे विलीन झंकार सकल, मुझमे लय है संसार सकल,
    अमरत्व फूलता है मुझमे, संहार झूलता है मुझमे!

    उदयाचल मेरा दीप्त भाल, भूमंडल वक्षस्तल विशाल,
    भुज परिधि-बंद को घेरे है, मैंनाक-मेरु पग मेरे है!
    दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर, सब है मेरे मुख के अंदर.

    दृग हो तो दृश्य अकाण्ड देख, मुझमे सारा ब्रम्हाण्ड देख,
    चर-अचर जीव, जग क्षर-अक्षर, नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर!
    शत कोटि सूर्य, शत कोटि चंद्र, शत कोटि सरित,सर,सिन्धु-मन्द्र!

    शत कोटि विष्णु-ब्रम्हा-महेश, शत कोटि जिष्णु-जलपति,धनेश!
    शत कोटि रूद्र, शत कोटि काल, शत कोटि दंढधर लोकपाल!
    जंजीर बड़ा कर साध इन्हें, हाँ-हाँ दुर्योधन! बांध इन्हें!!!

    सुने को साद ना सका हो मुझे बांध ने चला है!!!

    "तो ले, में भी अब जाता हू, अंतिम संकल्प सुनाता हु!
    याचना नही अब रण होगा, जीवन जय या की मरण होगा!

    टकराएंगे नक्षत्र-निकल, बरसेगी भू पर वहिन प्रखर!
    फण शेषनाग का ढोलेगा, विकराल काल मूँ खोलेगा!
    दुर्योधन ऐसा होगा, फिर कभी नही जैसा होगा!!!!

  • satish553 1w

    true life?

    मोहन याद नही क्या क्या देखा था, सारे मंजर भूल गए! तुम्हारी गालियों से जब गुजरे , अपना ही घर भूल गए!
    राधे राधे
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 1w

    my fov song

    व्यर्थ चिंता है जीवन की, व्यर्थ है मृत्य का भय!
    आत्मा को ना मार पाये शस्त्र-अग्नि-ना समय,
    आत्मा का जो वास्तविक है घर कही अन्यत्र है!
    है परिवर्तन ही सत्य, जूठ सबका साथ है!
    कुछ ना खोना कुछ ना पाना रिक्त रहते हाथ है!
    ईश्वर सर्व है सृष्टि सारी कहा उसको खोजना,
    जो भी होता शुभ ही होता सब उसीकी योजना!
    कामनाये फल की छूटे वोही सच्चा कर्म है,
    ईश्वर चरण में हो समर्पण होही केवल धर्म है!
    व्यर्थ चिंता है जीवन की, व्यर्थ है मृत्य का भय!
    आत्मा को ना मार पाये शस्त्र-अग्नि-ना समय..!
    राधे-राधे

  • satish553 1w

    आज तुझ्या विरुद्ध घर झाल..
    उद्या गांव जाईल..
    अत्ता तरी सुधर अशाने काय नाव राहील...

    खोट नाट बोलून लोकांना फसवल..
    खोट नाट बोलून लोकांना फसवल..
    इतकं कस रे खोट तुझ्या पाटावर पूजल...

    भावबंद..नातेवाईक यांच्याशी तू खुपच गोड बोलला..
    तुझा फायदा तू अलगद काढला..
    तुझा फायदा तू अलगद काढला...

    जन्मदात्या आई-बापाची तू कदर केली नही..
    पण पंढरपुराची वारी तू कदि चुकवली नही..
    पण पंढरपुराची वारी तू कदी चुकवली नही...

    सकाळी बुका संध्याकाळी दारू..
    एकठच बसून मग हळूहळू मारू..
    एकठच बसून मग हळूहळू मारू...

    एक दिवस तरी उजेडात येशील..
    एक दिवस तरी उजेडात येशील..
    त्या दिवशी मग कवडी मोल होशील...
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 1w

    क्या कमाया..!

    कुछ ईश्क किया कुछ काम किया,
    आखिर में तंग आकर हमने दोनों को अधूरा छोड़ दिया..!
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 2w

    हमारी बद दुवा मिलना भी लोगोंके नसीब में नही,
    और एक आप हो दुवा भी ठुकरा रहे हो!
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 3w

    धर्म क्या है?

    जो मनुष्य अपने कार्यो से लोगोंका उद्धार करे उसे धर्म कहा जाता है....
    जो मनुष्य दान-ज्ञान-स्वयं का पराक्रम किसी सिमा में सिमित रखता है और स्वार्थ में डूबा होता है उसे अधर्म कहा जाता है....उदा. पितामहा भीष्म, गुरुद्रोण, कर्ण

    पितामहा भीष्म:- हस्तिनापुर के सिंहसन् से वचनबध रहे...
    गुरुद्रोण:- अपने पुत्र को भौतिकसुख प्राप्ति में व्यस्त रहे, ना पुत्र को संस्कार दिये ना युद्ध कौशल्य
    कर्ण:- ज्ञानी होते हुवे भी सिर्फ अपना अपमान और पराक्रम को लौकिक किया, ना की अपने सूत समाज के लिए कुछ किया...

    तिन्हो के पास सब था पर कुछ सिमित सिमा तक सोचा और राजा से पीड़ित लोगोंको छोड़ दिया इसे अधर्म कहा गया और प्राण त्यागने पड़े

    वैसे ही येशु ख्रीस्त ने अपने समाज अपने लोगों के लिए कार्य किया तो वो धर्म हुवा✌️
    छत्रपती संभाजी महाराज ने भी अपने रयत के लिए कार्य किया तो वो धर्म हुवा ✌️


    फिर क्यू हम स्पर्धा करे दोनों के कार्य में अगर हम ऐसा करते है तो हो अधर्म है

    ""मानव जाती का कल्याण ही धर्म है""


    ... वासुदेव कृष्ण...

    भगवान ने इंसान बनाये और इंसान ने धर्म , जो जो मानव धर्म निभाता गया उसे भगवन बना के हमने बाट दिया हर एक धर्म में पर असल में मानवता यही एक धर्म है

    राधे राधे
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 4w

    ऎक ऎक र तू राम नाम घे
    जन्मास् तू अला सौसरि-
    आला सौसारी

    घे घे घे हरी नाम घे
    घे घे घे कृष्ण नाम घे
    माया सारी सोडून दे
    हात लाऊनी नाशिबाला का रडतो रे ठाई ठाई
    या संसारा पाई , या संसारा पाई || धृ ||

    तू सौंसार केला घाई, साऱ्या अंगाची झाली लाई!
    आयुष्य गेले हात-पाय थकले मुखी राम नाम नही!

    घे घे हरी नाम घे, माया सारी सोडून दे!
    || धृ ||


    तू म्हणशील घर-दार हे इथेच राहील सार,
    मेल्यावरती आपले घर गावाच्या बाहेर!
    || धृ ||

    तू म्हणशील पैसा-अड़का हा इथेच राहील बर का,
    मेल्या वरती आपल्या बरोबर मातीचा एक मड़का!

    || धृ ||

    तू म्हणशील बायका-पोर हे तुझ्या मागचे चोर,
    मेल्यावरती खापर फोड़तील तुझ्याच डोक्यावर!

    || धृ ||

    म्हणे तुकड्या-घोड़े-हत्ती याची क्षणात होईल माती,
    रावण मेला लंका जळाली तसिच होईल गती!

    || धृ ||

    ऎक भाई तू राम नाम घे
    ऎक भाई तू राम नाम घे
    नरा सारखा नर देह जन्मा अला
    नरा सारखा नर देह जन्मा अला
    या सौसरा पाई या सौसरा पाई

    © पहाटेचा वासुदेव
    @jit452000

  • satish553 4w

    विस्कटलेल नाथ...

    दुःख आहे मनी
    कारण विश्वास घात आहे प्रत्येक क्षणी
    भाऊ - बहिनी ला होत नही
    ही रीत नही खोटी
    बहिन आहे तुझी
    दुःख दाबून राग सावरेल
    नसेल जमल जन्म दिनी तर
    मरनांतरी खांदेकरी होशील ना?
    या क्षणीही नाहीच मिळाला वेळ
    तर ताई म्हणून दूर वरुण हाक देशील ना?
    @jit452000
    ©satish553

  • satish553 4w

    इश्क हो गया है..
    अब हैसीयत क्यों पूछु ..!

    @jit452000

    ©satish553