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  • scribblersecho 3w

    Word Prompt:

    Write a 8 word one-liner on Abode

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    Alas!! His abode was loving his Broken heart

  • scribblersecho 5w

    बेबाक़

    बेबाक हैं ये बूँदें, गिरती जो आसमान से झूमती
    बेबाक हैं ये नदियाँ, बहती हैं निडर बिना रुके
    बेबाक है ये सागर, ढकती है धरती जैसे चादर

    बेबाक है ये सूरज, चमकता है गर्व से आसमाँ में
    बेबाक है ये चाँद , रौशनी बनता है रात पर
    बेबाक हैं ये तारे, अनगिनत हैं आसमाँ में

    बेबाक ये तेरी अदा, शर्माती हुई ये हाय!
    बेबाक ये तेरी नज़रें, चीर देती ये दुनियाँ
    बेबाक तेरे होंठ, कहती हैं अपनी कहानियाँ

    बेबाक हमारा प्यार, है बेशर्मी से जताना
    बेबाक सी है ज़िन्दगी...
    अब तुम्हारे साथ ही है निभाना...

  • scribblersecho 5w

    एक अर्ज़ी है ...

    एक अर्ज़ी है हमारी,
    बता दूँ, तो मानोगी क्या ?
    घायल हूँ ज़ुल्फों से तुम्हारी,
    जता दूँ, तो सँवारोगी क्या?

    जिस क्षण निहारूँ तुम्हें,
    एक प्यारा सा ख़्वाब लगती हो।
    जैसे अंधेरी रैना में
    लिपटा हुआ माहताब लगती हो।

    हमसे क्या पूछती हो ?
    हम कहेंगे, तो मानोगी क्या ?
    किस क़दर फिदा हूँ उन पर,
    जता दूँ, तो सुन सकोगी क्या ?

    कि जब भी आओ सामने,
    आज़ाद ही रखना तुम उन्हें।
    छोटी सी गुज़ारिश है उनकी,
    पसंद नहीं बंधन जिन्हें।

    अगर देख सको मेरे नैनों में,
    महसूस तुम भी कर जाओगी।
    एक झलक को आतुर हर पल ये मन,
    शायद . . . समझ कभी तुम पाओगी।
    शायद . . . समझ कभी तुम पाओगी।

  • scribblersecho 8w

    --------^^उलझन√\____

    आज काफी अरसे के बाद,
    तुमसे जी भर के बातें करना है।
    बरसों पुरानी जो यादें सिमट गयीं,
    स्मृति शेष उन पन्नों में फ़िर से जीवन भरना है।

    बहरहाल, हम मिले तो सही,
    पर क्या हुआ था जो बस यादें रह गयीं।
    याद है वो पल भी जब समझते थे अनकही,
    अब कह कर भी बातें लगती हैं सरफिरी।

    फ़िर से इस दिल में हरकत सी हुई है
    तुम्हारे साथ उस चाय की तलब हुई है
    बेज़ुबान सी शाम सुरमयी क्यों हो गयी ?
    ये प्रकृति का खेल है, या साजिश कोई हुई है।

    जो उलझ सा गया था रिश्ता खुशनुमा,
    सुलझाने को तुमसे बातें करना है।
    बरसों पुरानी जो यादें सिमट गयीं,
    स्मृति संजीवन उन पन्नों में फ़िर से जीवन भरना है।

    _अतरंगी लफ्ज़

  • scribblersecho 8w

    ★------#असंतुष्टि#------★

    कुछ खाली सा है ज़िन्दगी में,
    काली ये रात,हाँथों में शराब का ग्लास_
    सितारों को घूर रही हूँ, निहार नहीं रही मैं
    हाँ ना! संतुष्ट हूँ, मग़र #तुम नहीं हो।_

    आँखों में नींद भरी है,
    उलझे ख़यालात, बेसुध वो लिबास_
    सिगरेट के कश पे कश ले रही हूँ, पी नहीं रही मैं
    हाँ ना! ख़ुश हूँ, मग़र #तुम नहीं हो।_

    खुली क़िताब को थामे हुए,
    अचरज भरी निगाहें, ज़िन्दगी दो राहे_
    दर्पण को देख रही हूँ, कुछ ढूँढ नहीं रही मैं
    हाँ! बिल्कुल संतुष्ट हूँ, मग़र #तुम नहीं हो।_

    दरवाज़े के किनारे बैठकर,
    दिल में दस्तक़, दिमाग़ से मन तक_
    भरे हुए जज़्बातों को बहने दे रही हूँ, रो नहीं रही मैं
    अरे! कहा ना!! बहुत ख़ुश हूँ, मग़र #तुम नहीं हो।_


    _अतरंगी लफ्ज़

  • scribblersecho 8w

    -------///बेपर्दा///-------

    (एक स्त्री के यौवन की जीवंत परिभाषा)

    तहज़ीब और गज़ भर की हया
    काफ़ी महँगा पड़ गया उस नज़र के सामने
    के नक़ाब क्या अब तो रुआब क्या
    तुम्हारी तो कुछ भी न रही...
    उस नज़र के सामने!

    मालूम पड़ता है दूर से देखा गया
    काफ़ी धुँधला सा चढ़ गया उस समर के सामने
    जो तीखी तरेर क्या अब वो ऐब क्या
    तुम्हारी तो झुक सी गयीं...
    उस समर के सामने!

    एक मर्तबा फ़िर से सोचा गया
    काफ़ी कमज़ोर सा गढ़ गया उस अजर के सामने
    जो ज़ोरावर सा अब वो ग़ुरूर क्या
    तुम्हारी तो ज़लील ही हुई...
    उस क़हर के सामने!

    _अतरंगी लफ्ज़

  • scribblersecho 9w

    Vintage Memories

    Memories of a past long lost, like old books, gather dust in a corner of the heart. Yet we don't throw them away. Because when we fall, losing all hope and desperately crying for help, it's those very memories, the old and dusty ones, that keep us warm and keep us afloat.

    -Sudipto Sinha

  • scribblersecho 9w

    Seduction

    Minted in gold and silver, she's delicate as a petal.
    Clothed in diamond and ruby, she's unimaginable.
    She dances like fire, exhibits her subtle elegance.
    She mutters in my ears, relinquishing her maddening fragrance.

    She's my Goddess, my love. She's more than enough.
    The glimpse of her gives me goosebumps, chilling my bones.
    She's an ocean, of passion. She's the only one.
    The seduction in her eyes digs deep in my heart and mind.

    Defining new boundaries to our love, we drown in this romance.
    Every inch of her radiates an irresistible essence of lust.
    Her fragrance puts me in a trance of desires.
    I submit to her seduction while she unmasks her hidden treasures.

  • scribblersecho 11w

    Awakened Spirit

    Arising up within the distant realm of spirits,
    My soul sprawls above the lush meadow.
    The first light of the day seeps through the mists,
    Touches my soul and fills me with the warmth of my ancestors.

    Barefooted I walk towards the mountains,
    All-father presents me with all the strength I need.
    The warrior within me roars louder with every step,
    I yearn of climbing to Valhalla with all my deed.

    Even though I meet with the storm and the fire,
    The love of Frigg shields me for this pilgrimage.
    I keep climbing high up the Yggdrasil,
    No one in the nine realms will stop me now.

    Hence, I stand in the chamber of Valhalla,
    Kneeling and gazing at the All-father.
    A sacred radiance wraps me and elevating my spirit,
    Odin anoints me for my hard work and virtue.

    Nevertheless, I open my eyes to find myself in my bed.
    I can sense heaven's eyes watching over me.
    Reviving the freshness of the wind and taste of the river,
    I will join the halls of Valhalla as I did in my dreams.

  • scribblersecho 11w

    ✡️✡️✡️✡️✡️"त्रिकोण"✡️✡️✡️✡️✡️

    मैं अग्नि हूँ, सर्वोच्च हूँ,नर हूँ;
    जलता हूँ मैं,द्वेषपूर्ण मैं,तितर-बितर हूँ_
    झकझोर दो,रुख़ मोड़ दो,शून्य सिहर हूँ;
    अदम्य हूँ मैं, अतिसौम्य मैं, क्यूँ 'अगर' हूँ?

    तुम "त्रिकोण" हो,
    मैं वंचित हूँ।
    तुम सृष्टि परिपूर्ण हो,
    मैं संचित हूँ, संचित हूँ, संचित हूँ।

    मैं जल हूँ, उत्पत्ति हूँ, नारी हूँ;
    शीतल हूँ मैं, व्यथा-अथाह मैं, वीर्य क्यारी हूँ_
    तंत्र तोड़ दो,स्वतंत्र छोड़ दो,अनभिज्ञ अनाड़ी हूँ;
    शक्तिशाली हूँ मैं, निराली मैं, क्यूँ स्थायी नहीं 'फिर जारी' हूँ?

    तुम "त्रिकोण" हो,
    मैं चित्त हूँ।
    तुम प्रकृति-निर्माण हो,
    और मैं किंचित हूँ,प्रपंचित हूँ,
    फिर भी मैं संचित हूँ।
    हाँ! मैं तुझसे संचित हूँ।।


    _अतरंगी लफ्ज़