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Reposts
  • shabir_ 7w

    हंसती थी मुस्कुराती थी दफ़्फ़ातन बेज़ार हो गई,
    इक दिन जब दुल्हन खुद से तैयार हो गई,

    फूल तोड़ने दिया बाग़ रौंदने दिया,
    वालिद की पगड़ी की खातिर खुद की गुनहगार हो गई "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 7w

    कहीं आरज़ू तलाश कहीं आबरू तलाश,
    जो खो गया है कहीं वो जुस्तजू तलाश,

    ना सजदे में मिलेगा ना सूफ़ीयत में मिलेगा,
    जो छिप गयी है तुझमें वो दिलजूँ तलाश "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 7w

    " पहले नाम के आशिक़ थे अब ज़बेर हो गए,
    बिछड़कर एक ग़ज़ल से फ़क़त अब शेर हो गए,

    ये कैसे-कैसे ख़्वाब देख रहे हम इनदिनों,
    आज फिर दफ़्तर के लिए हम देर हो गए "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 8w

    ज़रा ठहर कर पढ़िएगा.....

    #hindiwriters #hindilekhan

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    हम काम के सिलसिले से अपने शहर से बाहर जा रहे थे, रात का वक़्त था कार में हम पांच लोग थे. कार में गाना सुनते हुए अच्छी रफ़्तार में हम अपनी दूरी तय कर रहें थे, कार की रफ़्तार कुछ 110-120 किमी. प्रति घंटा थी चूकीं हम अपने समय से देर थे तो हमें रफ़्तार बरकरार रखनी थी, फिर एक वक़्त आया जब मेरा दोस्त जो की कार चला रहा था उसकी आँख लग गई और हमारी कार रोड से उतर गई और कुछ दूर जा कार पलट गई, रात का वक़्त था आस पास कोई नहीं मदद के लिए, हम जैसे तैसे कार से बाहर निकले. सबको चोट आई थी पर सब ठीक थे. कोई किसी से बात नहीं कर रहा था सब बस एक ख़ौफ़ से एक दूसरे को देख रहे थे जैसे सबने मौत को करीब से देख लिया, और उस वक़्त मेरे अंदर सिर्फ एक बात चल रही थी..... सिर्फ एक बात.....



    " दांए सोयी होगी या बांए सोयी होगी ?
    या सीने से पट तकिए भिगोई होगी?

    या उठा कर पुरानी डायरी,
    मुझसे छुपकर के रोयी होगी ?

    दांए सोयी होगी या बांए सोयी होगी ?
    मैं भी तो रोया था, हां वो भी रोयी होगी "....

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 9w

    " क़र्ज़ बढ़ गया है कितना, घर में जाले पड़ गए,
    तेरा ख़त पढ़ते-पढ़ते होंठ काले पड़ गए,

    ये कैसा तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ है जो बाकी रह गया उनसे,
    किसी और को जब भी छुआ जिस्म में छाले पड़ गए "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 10w

    "किसी को ग़ज़ल हासिल किसी को गज़लगो,
    हमें क्या, ज़माने में क्या चल रहा है,

    धुंआ-धुंआ हो रखा है कमरा मेरा,
    कोई तो है जो जल रहा है "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 10w

    कई हसीन रात गुज़ारा है हमने,
    तेरे चस्म-ए-आईना में खुद को निखारा है हमने,

    तेरे जाने के बाद कितनो ने हमें मोहब्बत से देखा,
    एक तेरी खातिर खुद की नज़र उतारा है हमने "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 10w

    "इक बार मेरे हाथों से सजना चाहती थी,
    डायरी में कहीं छुपा के रखना चाहती थी,

    किसके साथ गुज़रे मेरी रात, उसे फर्क़ नहीं पड़ता,
    मुझे ख़्वाब बस उसी के आएं, बस इतना चाहती थी "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 10w

    "ये शर्द हवा स्याह रात, तेरी याद और तन्हा हम,
    ऐसे हालात से गुज़रे तो गुज़र जाएंगे "


    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 11w

    जब भी जाने जाएं तेरे आशिक़ जाने जाएं,
    हम वक़्त के मिज़ाज पे अपना नाम नहीं बदलेंगे,

    भटक गया मेरे शहर में तेरा डाकिया जो कहीं,
    हम आखिर तक ये मकान नहीं बदलेंगे,

    हर किसी की तक़दीर में तुझसे हिज़्र कहाँ,
    हमें तो इस पर भी नाज़ है हम ये पहचान नहीं बदलेंगे,

    मेरा कैमरा ज़िद्द कर बैठा है तेरी तस्वीर क़ैद करने की,
    जब तलक़ उसकी ज़िद्द ना पूरी कर दें हम ये काम नहीं बदलेंगे "

    ~शाबीर
    ©shabir_