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Reposts
  • shikhapatil 28w

    कौन हूं मैं,
    क्या नाम है मेरा,
    है पहचान क्या मेरी,
    क्या अस्तित्व हैं मेरा...

    कभी बनती हूं मैं घर की लक्ष्मी,
    तो कभी आग में झोंक दी जाती हूं..
    कभी निभाती हूं किरदार मां का,
    तो कभी किसी के हवस का शिकार बन जाती हूं..

    नज़र में किसी की मैं बेटी,
    तो कभी रखैल बन जाती हूं..
    कभी किसी के लिए गर्व,
    तो कभी अभिशाप बन जाती हूं..

    ज़रा सी मुस्कान अगर किसी को दु,
    तो बलात्कार का न्योता भेजती हूं..
    अगर सेहमी रहूं ससुराल में,
    तो मैं अभागी कहलाती हू...

    जो बात मान लूं हर किसी की,
    तो मैं बुद्धू कहलाती हू..
    जो करु इंकार किसी गलत चीज़ से,
    तो एसिड से नहला दी जाती हूं..

    कहने को तो हूं मैं रूप देवी मां का,
    मगर दौलत के लिए बेच दी जाती हूं..
    जो अाई मैं किसी कोख में फूल बनकर,
    तो जन्म से पहले ही मार दी जाती हूं...

    कभी चीख, कभी आवाज़,
    तो कभी मुक बनकर रह जाती हूं,
    एक छोटा सा टुकड़ा अपनी ज़मीं का,
    मैं ढूंढ़ती रह जाती हूं..
    एक छोटा सा हिस्सा मेरे हक का,
    मैं ढूंढ़ती रह जाती हूं...

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 30w

    जिंदगी के बिखरे पन्नों को समेट कर अपने पास रख लूं,

    टूटे रिश्तों की यादों को पिरोंके अपने साथ रख लूं.....

    - शिखा पाटील

  • shikhapatil 32w

    Bada hi Sahi tarikka HOTA hai apni narazgi dikhane Ka,

    Bato ki is bhid me khamoshiyon ki rah ko apnane Ka...

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 34w

    आहिस्ते से कोई मेरे दिल को छू गया,
    आंखों में बसे उस ख्वाब को वो सच कर गया..
    ©shikhapatil

  • shikhapatil 35w

    Mere naino se behte askho ko
    dard smjhne ki gustakhi na karna..

    Ishq-e-nasha hai ye unka,
    Jo ankhon me na samaya hai....

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 43w

    मेरी हर नाराज़गी को उसने
    मज़ाक समझ लिया था,
    शायद मेरी एहमियत को उसने
    बेकार समझ लिया था...

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 49w

    रात के अंधेरे में पनपी,
    कैसी ये तन्हाई है,
    होंठो पर हसी है मगर,
    आंख भर आई है..

    बेकरार दिल है मेरा,
    बेचैनी सी छाई है,
    ना जाने आज किस बात पर,
    नींद से रुसवाई है..

    घेरे मेरे रूह को ये,
    किसकी परछाई है,
    खामोशी से मुझे सुनने,
    हुर परी कोई आई है..

    झिलमिलाते तारों के बीच,
    कैसी ये बदली छाई है,
    शायद ऐसी ही धुंधलाती घटा,
    मेरे मन में भी समाई है...

    - शिखा पाटील

  • shikhapatil 50w

    यह हर उस इंसान के लिए है जो अक्सर अपनी ज़िद को पूरा करवाने के लिए अपनों को ही तकलीफ़ पहुंचाता है और एक बार भी दूसरों की नज़र से सोचने की हिम्मत नहीं करता....

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    समझते हो..????

    वो जो चुपी तुमने थामे रखी है,
    क्या उसका मतलब तुम समझते हो..??
    अहंकार में बिताई जो रातें तुमने,
    क्या उनका मकसद तुम समझते हो..??

    महज़ अपनी बात मनवाने को, जो कदम उठाया तुमने,
    क्या उसका परिणाम तुम समझते हो..??
    कोई तो मजबूरी ज़रूर रही होगी उसकी भी मगर,
    क्या उसके दिल का हाल तुम समझते हो..??

    कभी कोशिश तो कि नहीं तुमने उसे समझने की,
    फिर क्या ऐसी तोहमत लगाने का अर्थ तुम समझते हो..??
    खून के रिश्तों को बड़ी आसानी से ठुकराया तुमने,
    पर क्या इन रिश्तों की एहमियत को तुम समझते हो..??

    बोलो न,
    क्या उसका मूल्य अपनी जीवन में तुम समझते हो..??
    क्या उसके जज़्बातों का मतलब तुम कभी समझते हो..??

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 50w

    अंधकार की लपटो ने मुझे इस कदर घेरा हैं,
    तलाश मुझे है एक उजाले कि जिससे सदियों का फासला हैं...

    ©shikhapatil

  • shikhapatil 54w

    Q aj Sab Kuch ho Kar bhi Khushi Nahi,
    Ek waqt tha JB Kuch na hote hue bhi Khushi se Zindagi jite the hum.....

    ©shikhapatil