shwetankadityaa_jadaun

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  • shwetankadityaa_jadaun 8w

    वो खयाली घर कहीं मेरा खुले कपाट ले बैठा
    मैं पंक्षी होके पिंजरे का ख्वाब आसमान ले बैठा
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 11w

    गैरों से उम्मीदें रखी नहीं जाती,
    अपनों से की उम्मीदें कभी पूरी नहीं होती ।

    पर सभी सवालों और जवाबों की तो बस एक जड़ थी जो कभी किसी के भी ज़हन से उखड़ती ही नहीं , "कि अपना कौन है ?"

    और हरबार बस एक ही जवाब मिला

    जब रौशनी रहेगी तब तक परछाई भी अपनी है
    जब आएगा अंधेरा तो हजार भय(डर) तेरे साथ होंगे।

    तात्पर्य समयानुसार , लोगों के किरदार बदल जाते हैं,
    अर्थात् सच यही है कि कोई अपना नहीं होता

    किसी ने सच ही बहुत सोच समझ कर कहा होगा
    "सब मोह माया है" या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो "जहां माया वहां मोह"

  • shwetankadityaa_jadaun 11w

    *क्योंकि ये पुरुषत्व पूर्ण समाज है*

    जहां त्रुटि भी महान इन्द्र सा देवता करेगा ,
    जहां दण्ड भी महान ऋषि योगी तय करेगा,
    परंतु त्रुटि एवं दण्ड के दो पाटों के मध्य में,
    पत्थर अहिल्याएं तड़पती रही राम राह में । ।।१।।

    क्योंकि ये पुरुषत्व पूर्ण समाज है

    जहां महिला अपहरण एक शिवभक्त करेगा,
    जहां राज्यनिकाला राजा शिवभक्त तय करेगा,
    परन्तु अन्याय एवं न्याय पलड़ो के मध्य में,
    वन वन भटकती सिताएं आसरे की राह में। ।।२।।

    क्योंकि ये पुरुषत्व पूर्ण समाज है

    जहां विधवा के अधिकार भी पुरुष छिनेगा,
    जहां प्रभु कीर्तन का दण्ड विष प्याला बहेगा,
    परन्तु अधिकार - प्रेम दो किनारों के मध्य में,
    ढूंढ़ती रहीं मीराएं पुरुष को पत्थर मूरत में। ।।३।।

    क्योंकि ये पुरुषत्व पूर्ण समाज है

    जहां वासनालिप्त हो कोठों पर पुरुष आया,
    जहां से संक्रामक रोग भी गृह तक पुरुष लाया,
    परन्तु नाचती मजबूरियां कुचक्र के मध्य में,
    कही जानें वाली वैश्याएं नए ग्राहक की राह में। ।।४।।

    क्योंकि ये पुरुषत्व पूर्ण समाज है


    *डॉ अंकिता सिंह (श्वेतांकादित्या जादौन)*

    *सुहाग नगरी (फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश)*
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 11w

    झूठ में थी जलेबी की चासनी
    और सत्य नीम सा कड़वा

    बेटी ज्यादा पढ़ गई तो
    अब निकल चुकी है हाथ से
    बेटा ज्यादा पढ़ गया तो
    अब विलायत जाएगा ठाठ से

    हर दिन सुनते ये व्याख्यान
    वो फूंक रही थी चूल्हा घर का
    बेटा बर्तन क्यों धूल दे
    नाक कटेगा रुतबे का

    दारू के पैसे में कमी न हो
    किताब को घर में पैसा न हो
    चल बिटिया उठा कुल्हाड़ी
    भाई के संग चल कमा दिहाड़ी

    बेटा पैदा तो बटी मिठाई
    लगी जैसे कोई शहनाई आई
    जब बेटी पैदा तो छाई उदासी
    गुड ढेली भी नहीं गई खिलाई

    ज्ञान झाड़ने की हम हिम्मत न जुटाई
    किसी राह अबला जान हो जाई कुटाई
    जो देखूं सत्य वो बोल रही
    अपनी बहन सुबकती देख रही

    सच से मुंह न फेरेंगे
    न प्रेम से रिश्ता तोड़ेंगे
    पर अन्याय जहां पर होगा
    हम चुप न फिर बैठेंगे ।

    डॉ अंकिता सिंह
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 11w

    *मै प्रेम की प्यासी चकवी हूँ*

    मै प्रेम की प्यासी चकवी हूँ,
    और प्रेम पर ही मर जाऊँगी,
    तुम लाख लगा लो पाबंदी,
    अब न पछाड़ मैं खाऊँगी ।

    धरती को तडपता देखूँ जो,
    तो अम्बर सी बन जाऊँगी,
    मैं उसकी प्यास बुझाने को,
    अंसुवन सी भी बह जाऊँगी।

    तन वार किए जो तुमने तो,
    आभूषण समझ सजाऊँगी,
    विष घूंट तुम्हारे शब्दों को,
    मै मीठा सोम रस बनाऊँगी।

    पानी पे बहा कर पत्थर मैं,
    नल नील सी बन जाऊँगी,
    प्रेम की इस रस धारा में मैं,
    शबरी माता सी बह जाऊँगी।

    बिन तेल जले जहां दीप जो,
    वो प्रेम ज्योति बन जाऊँगी,
    तुम बुझा के देखो मुझको तो,
    ज्वालामुखी सी जल जाऊंगी।

    शुष्क मरूस्थल में भी हर्षित हो,
    मै ऐसा पलाश पुष्प बन जाऊँगी,
    तब प्राण वायु मे तेरी विलीन हो,
    तन मन में बस कर रह जाऊँगी।

    मै प्रेम की प्यासी चकवी हूँ,
    और प्रेम पे ही मर जाऊँगी
    तुम लाख लगा लो पाबंदी,
    अब न पछाड़ मैं खाऊँगी।

    *डॉ अंकिता सिंह*
    *(फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश)*
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 14w

    आतंक का जिसका है किरदार
    उससे उम्मीद कोई भी निराधार
    उत्पात मचाते हैं जगह जगह
    सब झूठे कारण हैं झूठी वहज

  • shwetankadityaa_jadaun 15w

    जब गिरधर संग नैना जोरे
    मिटते सब अंधियारे मोरे
    बिन कागज बिन कलम चलाई
    लिख पाती की रामजुहाई

  • shwetankadityaa_jadaun 15w

    गिरधर हृदय विराजो ऐसे
    जग में बसत जलधि है जैसे !
    घाट घाट का ज्ञान बटोरे
    जमघट सब नदियन का जोरे !
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 15w

    गिरधर हृदय विराजो ऐसे
    जग में बसत जलधि है जैसे !
    घाट घाट का ज्ञान बटोरे
    जमघट सब नदियन का जोरे !
    ©shwetankadityaa_jadaun

  • shwetankadityaa_jadaun 15w

    मीरा प्रेमावली

    जब गिरधर संग नैना जोरे
    मिटते सब अंधियारे मोरे
    बिन कागज बिन कलम चलाई
    लिख पाती की रामजुहाई

    गिरधर हृदय विराजो ऐसे
    जग में बसत जलधि है जैसे !
    घाट घाट का ज्ञान बटोरे
    जमघट सब नदियन का जोरे !

    अनुनय विनय करत न बानी
    भर लीन्हो अंखियन में पानी!
    मदन मोहिनी तेरी छवि यूँ
    भोर चमकती तम भीतर यूँ!

    मैं कोकिला तू सावन मोर,
    दीन बन देखूं तेरी ओर।
    कहन लगौ जग बावरि मोहे,
    लाज अब तेरी बाट जोहे
    ©shwetankadityaa_jadaun