sillypoet

�� see the good �� Dil se dil tak ��

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  • sillypoet 11h

    मैं कविताओं सा लिखती हूँ
    वो गीत सा मुझको गाता है
    मैं ख्वाब सा उसमें बस्ती हूँ
    वो चेहरे पे मूस्कान सा मेरी हर रोज चमक के
    आता हैं।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 3d

    निकले तो मंजिल के सफ़र में
    एक साथ ही थे,
    पर हुनर तो देखो उनकी बेवफाई का
    उन्होने लंबा सफ़र देख मंजिल ही बदल ली।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 4d

    ख़बर तो ये भी
    मिली हैं हमें
    की उनके पास हर
    ख़बर रहती हैं हमारी
    अरे,
    जरा उन्हें कोई तो
    समझाओ ये इश्क़
    नही तो क्या हैं।
    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 1w

    ख्वाहिशे अब मेरी मुझसे सवाल नही करती
    अब उसे भी,
    मेरे बाबा के कंधों का बोझ जो नज़र आता हैं।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 2w

    ज़िक्र आज भी उनका
    अक्सर मेरे लफ्जों से छलक जाता हैं,
    कितनी मोहब्बत हैं मुझे आज भी उनसे ये सबको पता चल जाता हैं।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 5w

    सचाई के सफ़र पे चलने वाले अक्सर अकेले ही मिला
    करते हैं,��
    चर्चे में तो अक्सर बैमान ही रहा करते हैं। ��

    Read More

    लोगो को...
    पैरो में उसकी अक्सर घिसी चपल ही दिखा करती थी,
    किसी को क्या ख़बर
    कमबख्त उसूलों पे जो चला करता था।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 6w

    चाहे हाथ किसी का भी हो तेरे हाथ में,
    पर जाना तू आज भी मेरी
    मोहब्बत के नाम से जाता हैं।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 7w

    आज गुजरे कल के दराज खोले
    वक्त के सिल्बटो में लिपटी कुछ यादे मिली,
    कुछ संग गुजारी हँसीन मुलकाते मिली
    मेरी सासो से लिपटी तुम्हारी खुश्बू मिली,
    बस एक तुम ना मिले।

    कुछ कसमे मिली कुछ वादे मिले
    तुम्हारी बाहो में बिताई वो खूबसूरत राते मिली
    कुछ टूटी ख्वाहिशे मिली
    बंद दरवाजो में नम आंखे मिली
    बहोत ढूंढा बस एक तुम ना मिले।


    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 8w

    सुना हैं,
    बहोत मरते हैं तुम पर
    तो एक बात बताओ फिर मुझे जीने की उम्मीद क्यूँ मिलती हैं तुम्हें देख कर।

    __साक्षी सिंह__

  • sillypoet 9w

    तुझसे हुई मोहब्बत का ये अंजाम हैं,
    एक हाथ में कलम
    दूसरे हाथ में जाम हैं।

    __साक्षी__