simpebidhuri

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  • simpebidhuri 2d

    काला धागा नज़र से तो बचा सकता है
    लोगों की मगर जो तेरे अंदर नज़र
    चुरा रहा है तेरे से उस से कौन बचाए
    पाएगा तुझे कोई भी नहीं जब तक की
    तू ख़ुद से कोशिश नहीं करेगी
    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 4d

    लाखों में एक हूँ मैं,
    (सोच कर चलना हार होगी तो ख़ुद से ही होगी ना)

    अगर कोई और कर सकता है तो मैं क्यों नहीं,
    (अपने उप्र विश्वास करना चाहें कुछ भी हो जाए)

    एक हार कुछ ना कुछ सीखा कर ही जाती हैं,
    (इसका मतलब पुरानी गलती को मत दुहराओ)

    मैं नहीं कर सकतीं/सकता,
    ( ये ख़ुद से झूठ बोलना बन्द करो)
    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 5d

    होश सँभाल अपने दुनिया गिराने ही आएगी,

    सहानुभूति देकर आज नहीं कल भी लोगों की भीड़ चली जाएगी,

    ये काम नहीं झूठ का खेल है सारा,

    नहीं तो जो रुकने वाला नहीं हैं वो तो रेंग कर भी मंज़िल तक जाता हैं,

    ना बना बहाने तेरे मेरे जैसे ना जाने कितने क़िस्मत को रोज़ कोस रहे हैं,

    बेकर की बात तो लोग सुबह से शाम तक घर वाले भी 24 घंटे करते हैं सुनता कौन है हम,

    उनका काम ही हैं बोलना पर अपना क्या काम है काम करते जाना ,

    हाँ माना थोड़ा कठिन है रास्ता,
    हाँ माना थोड़ा कठिन है रास्ता,

    पर चलना तो हर हाल में है
    लोग आज भी ऐसे कल ऐसे ही है।
    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 1w

    वो जीवन नहीं जो तुम दूसरों की मर्ज़ी से जी रहे हो, जनाब उसको समझौता कहाँ जाता हैं ज़िन्दगी तो तब बनती है जब सपनों को जिया जाता हैं।
    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 1w

    सच

    सच मैं ही क्या बोलूँ जब किसी को कुछ सुनाई ही नहीं देता है कुछ,

    ना जाने दुसरे की बुराई कैसे सुनाई देती है एक सच ऐसा ज़हर है जिसको कोई पीना ही नहीं चाहता है,

    किसी का मज़ाक़ बनाना हो तो 10 लोगों का समूह एक जुट हो जाता हैं,

    पर रोड पर कोई दुर्घटना हो जाए तो ? जेब से बहार मोबाइल फ़ोन तो आता है पर सहायता के लिए एक हाथ की खोज भी पुरी नहीं हो पाती हैं,

    समझ नहीं आता फिर वो समाज कहाँ रह जाता जब समय होता है बातों में सब से आगे और काम में सब से पीछे।

    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 1w

    आँखों की नमी मेरी कमज़ोरी की गवाह नहीं है,
    बस थोड़ा थक गईं हूँ इसका मतलब मैंने हार मान ली ये नहीं है।

    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 2w

    जो बुराई करते है उनके सामने कितना ही कुछ पा कर के चले जाओ, काम वो बुराई का ही करेंगे फिर भी।
    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 2w

    क्या लिखूँ अब

    किसी का भरोसा टूटा,
    तो किसी का दिल,
    कोई ख़ुद ही टूट गया,
    किसी की ताक़त कमज़ोरी बनी,
    किसी का फ़ैसला ग़लत हुआ,
    कोई समझ ही ना सका,
    किसी ने ख़ुद ही सब कुछ छोड़ा,
    तो कोई बहाना बना बैठ गया,
    किसी ने हिम्मत ही नहीं की,
    तो कोई क़िस्मत मान बैठ गया,
    कोई किसी की राह ताकता रहा,
    किसी का डर हावी हो गया,

    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 2w

    मेरे ही किसी अपने ने कहाँ कर ले कोशिश तू कितनी भी कुछ बन नहीं पाएगी।

    मैंने भी बोल दिया देख अब नज़ारा मेरी मेहनत का गवाह तुझे ही कल मेरी कामयाबी का बनाना है ।

    हा देखते हैं तेरा नसीब हमारे बिना कैसे बन ना है।

    देखो मेरी कदम-कदम की कहानी हासिल तो मुझे मेरा मुक़ाम हर हाल में हर क़ीमत पर करना है।

    ©simpebidhuri

  • simpebidhuri 2w

    हमने मैदान क्या छोड़ा कुछ समय के लिये,
    लोग अपनी सरकार समझ बैठे ,
    मैं वो खिलाड़ी नहीं जो कुछ चोटों से हार मान जाऊँ ,
    मैं तो कहानी का वो किरदार हूँ जो मर कर बार-बार ज़िन्दा हो जाता है।

    ©simpebidhuri