souravsahu

|| Storyteller ||

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  • souravsahu 2w

    ग़र देख पाओ तो,
    पाकिट में झाँक कर देख़ो
    कुछ सिक्के हैं साँसों के गिन कर रखे हुए
    और जो तुम दुनिया बटोर रहे हो
    उनमें ये खर्च हो रहे हैं

    बस के खर्च ना कर देना सब
    नौकरी, बंगला, गाड़ी में ही
    कुछ मुट्ठी भर सांसें बचा कर रखना
    तब के लिए, जब तुम्हे मालुम पड़ेगा
    कि ये सिक्के, साँसों के, गलत खर्च हो गए

    तब, वो मुट्ठी भर साँसों को
    तुम खनकाते हुए लेना
    ताकि ऐसा लगे कि, पल भर के लिए हीं सही
    दौलत से नहीं, ज़िन्दगी से अमीर हुए तुम ।

    -diszsrv

  • souravsahu 5w

    ग़ुम हो गई वो कह के ये, 'मैं सबको क्या बतलाऊँगी?'
    'तुम देखना जी भर के मुझको, मैं चौदहवीं को आऊँगी'

    'ये नहीं कि आबरू हमको हमारी प्यारी है
    हो बादलों का परदा तो मैं उनसे भी छट जाऊँगी'

    'होंगी न जाने कितनी आँखें, पहरा दिए दीदार को
    तुम दिल से मुझको देखना मैं ख़ुद नज़र आ जाऊँगी'

    'सरे-आम सब, चिलमन से जब, हों रुख़ किये मेरी तरफ
    तुम निगाह-ए-बोसा माँग लेना, मैं ख़ुद नहीं दे पाऊँगी'

    उलझन ये है चिरागों की वो बुझ के भी जलते रहेंगे
    ग़र स्याह हुई महफ़िल तो मैं तुमसे लिपट हीं जाऊँगी'

    'मुझको मगर तुम रोकना इस बार जो तुमसे मिलूँ
    अबकी अमावस जो हुई मैं फिर नहीं मिल पाऊँगी'

    ग़ुम हो गई वो कह के ये, 'मैं सबको क्या बतलाऊँगी?'
    'तुम देखना जी भर के मुझको, मैं चौदहवीं को आऊँगी'


    -diszsrv

    [चौदहवीं: Full moon night; आबरू: Dignity;
    दीदार: Sight; चिलमन: Curtain; बोसा: kiss; स्याह: Dark ]

  • souravsahu 5w

    उस तरफ़ के जिधर बचपन रखा है मैंने
    के जहाँ जा ही नहीं पाता कभी, मैं लाँघ कर ज़िन्दगी

    सड़क के उस पार
    कोई कुल्फ़ी वाला हो जैसे, ये बचपन
    सब तकते हैं, एक दूसरे को
    कोई दे दे वो सुकूँ का इक रुपया उधार
    तो दौड़ न जाएँ हम सड़क के पार
    माँग लेने को, वो लकड़ी पे लिपटा
    दूध के गाढ़े मलाई के जैसा
    कुल्फ़ी सा, बचपन

    गर्मी भी तो है न कितनी
    ज़िन्दगी की संजीदगी में
    हाँ, अब दौलत भी है, पर कागज़ी
    जिसमें वो खनक नहीं
    जो था, उस दोस्त से माँगे
    उधार के, एक रूपये में
    जिसे दबोच कर सड़क के पार दौड़ जाते थें
    नहीं आता था सड़क पार करना, फिर भी
    बचपन था, तो चाहत थी
    अब तो यूँ देख रहे हैं, टुकटुकाये, उस पार
    उस कुल्फ़ी के ठेले को
    सड़क पार करना आता है, फिर भी, झिझक है

    मिल जाए कोई दोस्त, जिसके एक रुपये में
    हो इतनी ताकत कि ढ़केल दे मुझे
    ज़िम्मेदारियों से परे
    सड़क के उस पार

    उस तरफ़ के जिधर बचपन रखा है मैंने
    के जहाँ जा ही नहीं पाता कभी, मैं लाँघ कर ज़िन्दगी

    -diszsrv

  • souravsahu 5w

    कुछ तो है न,
    जो तोड़ कर भी जोड़ रही है हमें
    फ़िर से, यूँ कि,
    टूटना याद भी न रहा अब !
    और यूँ भी, कि फ़र्क नहीं पड़ता
    के हम जुड़ेंगे या नहीं, पूरे, फिर से

    कुछ अधूरा ही सही, तुमसा, तुम्हारा
    तुमसे ज़्यादा है अब, मेरे पास
    और मैं, मैं तो हमेशा हूँ न
    तुम्हारे पास,
    खुद से ज़्यादा, तुम्हारा!

    कुछ तो है न,
    जो तोड़ कर भी जोड़ रही है हमें
    फ़िर से, यूँ कि,
    टूटना याद भी न रहा अब !

    -diszsrv

  • souravsahu 5w

    मोहब्बत में कैसे शिक़वे उससे करें भला हम
    जाने दो न छोड़ो, हाँ हर बात तेरी सच्ची
    कितने सवाल हमने, हँसके भुला दिए हैं
    इक उम्र की वकालत इक उम्र तक हीं अच्छी



    -diszsrv

  • souravsahu 6w

    हाँ डूब जाती हैं कागज़ की कश्तियाँ, माना
    तो छोड़ देते हैं क्या हम कश्तियाँ बहाना ?



    -diszsrv

    #onfallingandgettingup

  • souravsahu 8w

    मैं भूल जाना चाहता हूँ तुम्हे हमेशा के लिए
    और माँ मुझे रोज़ बादाम खिला रही है

    आफ़तें कैसी-कैसी



    -diszsrv

  • souravsahu 8w

    'You know it's going to be tough, right?' she said, pouring the cranberry juice into the scotch glass, which still had the leftover from vodka that she'd just finished gulping.
    'I am not drinking that!' I said, 'And why do I sense a discouraging tone in your voice.' We'd met after two weeks; owing to the fact that I was caught up with a stupid endeavour of reading one book a day, I'd ignored her calls and texts, and yet I'd read just 5 books.
    She nodded in a subtle disagreement and went to the kitchen. The screeching sound from the glass that she dragged out of the cabinet apprised me of her discord.
    'You don't have to marry me!' I said, 'In case you think I'll not make it big as a writer, you don't have to feel bound to me.'
    She nodded again. Her face was familiarly red, in anger, however, she calmly poured the juice into the glass, the neat one. Right as I leaned ahead of the couch to pick the glass, she picked it and spilled the juice on my face.
    'Okay! I saw this coming!' I said, wiping the juice off my face.
    'I am discouraging you! I am criticizing you! I'll not marry you because I am afraid you won't be a successful writer. I am the only bad one here! And you won't drink juice from my glass!' she said, in a bass laden voice. Ah! She was too cute to be rebellious. I poured the juice into her glass and gulped it down in a go.
    'I am sorry!' I said. She settled in the couch, I sat beside her.
    'I have no idea why you brought this up.' I said, trying to hold her hand, 'There is a lot of time left. We are still kids!' she pulled her hand away.
    'All I am saying is, reading hundred books is not going to make you a writer.' she said. Her voice softer.
    'Right! But that's how I think I should start!' I said, 'I will be happy to know if you could suggest any other way.'
    She turned her face towards me and said something which was going to stay with me for a lifetime.
    'See, I know it's a big thing for you and I am happy you've a passion. But, don't you think, that to able to write stories, instead of reading stories, you should rather live them. And there is not much time Sourav! At least, the way I look at things.' she paused for a while. I held her hand. She continued.
    'I am not stopping you from anything. Just that I know you get obsessed with the things you want to do. And you should be, but, in the right direction, so you don't miss living this life we have.' she stopped. All I wanted then was to make her laugh.
    'Yeah right!' I said, half heartedly, 'You are saying these things just because I made you buy books for me, right? You want your money?' I giggled.
    'Fuck you!' she said, smiled, finally opening a side a hug, 'go read and die with your books. I don't need your money.'
    'Don't worry I'll live my stories!' I said, she kept smiling, unaware, of how little time we were left with.

    -diszsrv

  • souravsahu 8w

    वो जिसमें तू भूले दुनिया जहाँ को, तू वही कर
    वो जिसमें तू छू ले तेरे आसमाँ को, तू वही कर



    -diszsrv

  • souravsahu 8w

    रोयेंगे फ़लक के सितारे भी देख
    वो ज़मीं से सितारा जो रूठा गया है

    -diszsrv


    #RIPSushantSinghRajput